Manipur violence: मणिपुर जाएंगे कल विपक्षी दल के नेता, क्या शांत होगी जातीय हिंसा की आग

नई दिल्लीःमणिपुर में जारी हिंसा को लेकर संसद के दोनों सदनों में आक्रामक रूख अख्तियार कर चुके विपक्षी गठबंधन इंडिया (इंडियन नेशनल डेवपलपमेंट इन्क्लूसिव अलायंस) के घटक दलों के नेताओं 29 जुलाई को मणिुपर जाने का फैसला किया है। विपक्षी दल के नेता वहां जाकर जमीनी स्थिति का आकलन करेंगे। साथ ही हिंसा प्रभावित मणिपुर में उत्पन्न समस्याओं के समाधान के लिए सरकार और संसद को अपनी अनुशंसा भी देंगे। उधर, केंद्र सरकार पहले ही मणिपुर हिंसा की जांच सीबीआई के हवाले कर चुकी है और प्रधानमंत्री स्वयं इस मामले पर नजर रख रहे हैं। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्या विपक्ष शांति का कोई रास्ता तलाश सकेगा या यह दौरा महज सियासी दौरा ही बनकर रह जाएगा।

वहीं, लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने मणिपुर हिंसा की सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश से जांच कराने की मांग की है। गोगोई ने कहा है कि भाजपा देश को बता रही है कि मणिपुर में सबकुछ ठीक है, लेकिन हकीकत यह है कि वहां हिंसा जारी है। इसलिए हम चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश से हिंसा की जांच कराई जाए। ताकि सच्चाई देश के सामने आ सके। उन्होंने कहा कि वहां लोगों को हथियार कैसे मिले, यह ऐसा सवाल है जो मणिपुर की राज्य सरकार की विफलता को उजागर करता है। उन्होंने कहा, मैं मणिपुर जाऊंगा और सच्चाई का पता लगाऊंगा और उस सच्चाई को संसद के सामने रखूंगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार विपक्षी सांसदों का प्रतिनिधिमंडल 29-30 जुलाई को मणिपुर का दौरा करेगा। प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी और गौरव गोगोई, तृणमूल कांग्रेस की सुष्मिता देव, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी, द्रमुक की कनिमोई, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की वंदना चव्हाण, राष्ट्रीय लोक दल के जयंत चौधरी, राष्ट्रीय जनता दल के मनोज कुमार झा सहित कई अन्य नेता शामिल हो सकते हैं।

तृणमूल कांग्रेस की सुष्मिता देव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हम मणिपुर के लोगों के साथ हैं। हम चिंतित हैं, हम चाहते हैं कि राज्य में शांति बहाल हो। सरकार स्थिति को नियंत्रित करने में विफल रही है, इसलिए हम वहां जाना चाहते हैं। हम देखना चाहते हैं कि वहां क्या समाधान निकाला जा सकता है।

कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन इंडिया के अन्य घटक दल मानसून सत्र के पहले दिन से ही मणिपुर में जातीय हिंसा के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से संसद में बयान देने और इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा कराए जाने की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे पर हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही शुक्रवार को भी बाधित रही। यही नहीं, कांग्रेस ने मणिपुर हिंसा के मुद्दे पर संसद में जारी गतिरोध के बीच बुधवार को लोकसभा में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था, जिसे लोकसभा अध्यक्ष ने सदन में चर्चा के लिए स्वीकार कर लिया था।

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