Achievements of Women in the Indian Army: भारतीय सेना में नारी शक्ति का नेतृत्व और उपलब्धि

भारतीय सेना में महिलाओं का नेतृत्व और उपलब्धि के सातवें और अंतिम भाग में बात होगी उन नारी शक्ति की जिन्होंने भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करने का सपना देखा और इसे अपने जज्बे से पूरा भी किया। आज बात होगी उस नारी शक्ति की जो इंडियन आर्मी में पिछले 20 सालों से कैडर्स को कमांडो को ट्रेनिग देकर देश की रक्षा के लिए तैयार कर रही हैं। आज आप जानेंगे उन नारी शक्तियों के बारे में जो भारत की सुरक्षा के लिए सीमा पर मुश्तैदी से तैनात हैं।

रूचि शर्मा

कैप्टन रुचि शर्मा ने प्रदेश और देश का नाम रौशन किया। उन्होंने भारतीय सेना में पहली महिला ऑपरेशनल पैराट्रूपर बनने कीगौरव हासिल किया। इस शानदार उपलब्धि के मौके पर रुचि शर्मा ने कहा कि मैं मुकाबलेके लिए और व्यक्तिगत रूप से तैयार थी। मुझे लगता है कि महिलाओं को लड़ाकू हथियार उठाने का मौका दिया जाना चाहिए। बता दें रुचि शर्मा ने साल 1996 में इंडियन आर्मी ज्वॉइन की थी। उन्होंने अपनी मेहनत और हौसले के दम पर ये मुकाम हासिल किया और देश की बेटियों के सामने एक मिसाल पेश बनीं।

सीमा राव

भारत की बेटी सीमा राव पर देश को गर्व है। वो7डिग्री ब्लैक बेल्ट धारी मिलिटरी मार्शल आर्ट में भारत की एकमात्र कमांडो ट्रेनर हैं। सीमा भारतीय सेना में पिछले 20 सालों से कंमाडों की ट्रेनिंग दे रही हैं। बता दें सीमा स्कूबा ड्राइवर,रॉक क्लाइम्बिंग, कॉम्बेट शूटिंग इंस्ट्रक्टर,फायर फाइटर,में एचएमआई मेडलिस्ट हैं। इसके अलावा वो मिसेज इंडिया वर्ल्ड की फाइनलिस्ट भी रही हैं। सीमा के नाम एक और शानदार उपलब्धि दर्ज है। वो वर्ल्ड की उन दस महिलाओं में शामिल हैं मार्शल आर्टजीत कुने दोसे सर्टिफाइड हैं।जिसकी शुरूआत1960में ब्रूस ली ने की थी। सीमा को अपने पिता रमाकांत सिनारी से देश सेवा करने की प्रेरणा मिली। उनके पिता रमाकांत ने पुर्तगालियों से गोआ को आजाद कराने में अहम भूमिका निभाई थी।पिता के मार्गदर्शन में सीमा ने देश सेवा का सपना देखा और इसे अपनी ईमानदारी और जज्बे से पूरा भी किया।

उषा किरण

उषा किरण बटालियन फॉर रेसोल्यूट एक्शन (कोबरा) की सबसे युवा और पहली महिला सदस्य हैं। उन्हें छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ देश की रक्षा करने के लिए तैनात किया गया है। वो भारतीय सेना की पहली महिला कोबरा कमांडो हैं जो नक्सली इलाके पर दुश्मनों से मोर्चा संभालने के लिए तैनात हैं। बता दें उषा सीआरपीएफ में शामिल होने वालीअपनी परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं। उनके पिता और दादा भी देश को अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इस बहादुर नारी शक्ति को देश सलाम करता है।

सुप्रिया चौधरी

राजस्थान की रहने वाली सुप्रिया चौधरी ने प्रदेश और देश का नाम रौशन किया। उन्होंने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट का पद हासिल कर इतिहास रच दिया। ऐसा करने वाली वो देश की अब तक की दूसरी और राजस्थान की पहली महिला बनीं। बता दें सुप्रिया एक साइंटिस्ट भी हैं। वो साल 2013 से ओएनजीसी में बतौर साइंटिस्ट जॉब कर चुकी हैं। सुप्रिया ने SSBकी परीक्षा उत्तीण की और भारतीय सेना में सेलेक्ट हुईं। वो ट्रेनिंग के दौरान इकलौती महिला थीं। सुप्रिया ने देहरादून स्थित ONGC हेडक्वार्टर में रिपब्लिक डे परेड को भी लीड किया है।

LOC पर महिला सैनिक टुकड़ी तैनात

भारतीय सेना के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब LOC पर महिला सैनिक की टुकड़ी तैनात की गई हो। असम रायफ़ल्स की 30 महिला सैनिकदुश्मनों से देश की रक्षा करने के लिएकश्मीर में भारत-पाक की नियंत्रण रेखा के पास तैनात हैं। देश की ये नारी शक्तियां मुश्तैदी से बॉर्डर पर देश की सेवा में लगी हुई हैं। LOC पर इनका काम महिलाओं की तलाशी लेना और आतंकी गतिविधियों में लिप्त महिलाओं से निपटना है। साथ ही ये सभी महिला सैनिक आपात स्थिति में युद्ध करने में भीपूरी तरह सेसक्षम हैं।भारत की इन जांबाज नारी शक्तियों को देश सलाम करता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *