मध्यप्रदेश में सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने से युद्ध शुरू हो गया हैं। वहीँ शिवराज सिंह चौहान वहां की स्थिति को लेकर कहा कि मध्यप्रदेश सरकार को पता है कि इनके पास अब बहुमत नहीं है परन्तु लगातार संवैधानिक पदों पर नियुक्ति की जा रही हैं। कुछ अधिकारी इनके कहने पर काम कर रहे हैं,मैं आज उनको चेतावनी देना चाहता हूं एक-एक की सूची बना रहा हूं, उनसे निपटा जाएगा, एक-एक का हिसाब किया जाएगा। वहीँ आज रिटर्निंग अधिकारी ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा नामांकन के लिए ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और सुमेर सिंह के रूपों को मंजूरी दी है।
वहीं मध्यप्रदेश में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने राज्यपाल को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि अल्पमत की कमलनाथ सरकार को राज्य में महत्वपूर्ण नियुक्ति या स्थानान्तरण के अधिकार का दुरुपयोग करने से रोका जाए। पिछले 3 दिनों में अल्पमत सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों पर रोक लगाने की भी मांग की गई है।बता दें कि मध्य प्रदेश होली से एक दिन पहले 9मार्च को सियासी उठापटक तेज हो गई थी। राज्य के कद्दावर कांग्रेसी नेता रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक 22कांग्रेस विधायक अचानक भोपाल से कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु चले गए। इन 22विधायकों में से 6कमलनाथ सरकार में मंत्री भी थे। इस सभी विधायकों ने अपने इस्तीफे स्पीकर को सौंप दिए हैं। स्पीकर ने 6मंत्रियों का इस्तीफा तो स्वीकार कर लिया है, लेकिन 16विधायकों का इस्तीफा अभी उन्होंने स्वीकार नहीं किया है।