देश में बढ़ती मोब लिंचिंग की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए, आरोपियों को फूलों से, मालाओं से उसका स्वागत किया जाए, तो देश से मोब लिंचिंग की समस्या का समाधान कैसे होगा। ऐसा ही एक घटना बुलंदशहर में देखा गया है, जहाँ आरोपियों के जमानत से बाहर आने पर उनका स्वागत फूल की मालाओं से किया गया, साथ ही उनके साथ लोगों ने सेल्फी भी ली।
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में 3 दिसम्बर 2018 में मोब लिंचिंग का एक मामला सामने आया था, 3 दिसंबर को स्याना के चिंगरावटी गांव में गौकशी की अफवाह के बाद हिंसा भड़कने से इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस दौरान पूरे गांव में जमकर आगजनी और बलवा हुआ था। बदमाशों ने सरकारी वाहन और पुलिस चौकी को आग के हवाले कर दिया था, जिसमे 38 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जिसमें 7 लोगों को शनिवार के दिन जमानत मिल गयी। जेल से बाहर आने के बाद उन सातों आरोपियों को माला पहना कर तथा साथ में सेल्फी लेकर उनका स्वागत किया गया। साथ ही जय श्री राम तथा वन्दे मातरम के नारे भी लगे। उन सातों आरोपियों में जीतू फौजी, शिखर अग्रवाल, हेमू, उपेंद्र सिंह राघव, सौरव और रोहित राघव शामिल है।
ऐसा ही एक मामला झारखण्ड से आई थी, जहाँ बीफ ले जा रहे एक शख्स की हत्या कर दी गयी थी, जिसके बाद झारखण्ड पुलिस ने 8 लोगों को गिरफ्तार किये था। फिर जब वे जेल से जमानत पर बाहर आये तो, झारखण्ड के तत्कालीन केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री जयंत सिन्हा ने भी उनको माला पहना कर उनका स्वागत किया तथा साथ ही अपने कार्यालय में मिठाई भी बांटी।
ऐसे कई मामले है जिनको देख कर लगता है कि, लोग मोब लिंचिंग को बढ़ावा दे रहे है। एक ओर प्रधानमंत्री इसके खिलाफ चिंता जताते है साथ ही ऐसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की बात कहते है। अब सवाल ये उठता है कि, मोब लिंचिंग के खिलाफ आम जनताओं की ऐसी प्रतिक्रिया देश को किस ओर लेकर जा रही है।