Buddha Purnima 2024: हिन्दू धर्म में जहां हर एक त्योहार ज़ोरो शोरो से मनाया जाता है, वहीं वैशाख महीने में एक पर्व बुद्ध पूर्णिमा भी आता है। वैशाख महीने में आने वाला यह त्योहार भगवान बुद्ध की जयंती को समर्पित है और बौद्ध शास्त्रों के अनुसार यह दिन बहुत शुभ माना जाता है। हिंदू वेदों में दिए गए इस पर्व के विधि- विधान और महत्वों को आज भी याद करके इस दिन लोग धार्मिक क्रियाओं में हिस्सा लेते हैं।
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, दूसरा महीने वैशाख में यह त्योहार इस साल 23 मई को पड़ रहा है। आज के दिन लोग, व्रत, गंगा नदी में स्नान, भगवान को ध्यान लगाना आदि क्रियाएं पूरी करते हैं। इस दिन तमाम लोग व्रत रखते हैं और व्रत की ही बनाई हुई चीजें खाते हैं। इस दिन भगवान विष्णु को याद किया जाता है क्योंकि हिंदू धर्म के अनुसार भगवान विष्णु को गौतम बुद्ध का अवतार माना गया है ।
क्यों मनाया जाता है यह त्योहार ?
माना जाता है कि यह पर्व सिर्फ इसलिए ही नहीं मनाया जाता क्योंकि इस दिन गौतम बुद्ध पैदा हुए थे बल्कि इस दिन उनको बौद्ध विद्याओं के ज्ञान की भी प्राप्ति हुई थी। यह त्योहार सिर्फ भारत में ही नहीं कई देशों जैसे नेपाल, चीन, सिंगापुर, वियतनाम, थाइलैंड, जापान, कंबोडिया, मलेशिया, श्रीलंका, म्यांमार और इंडोनेशिया में भी बड़ी आस्था के साथ मनाया जता है। इस दिन के अवसर पर बौद्ध धर्म के लोग दिपावली की तरह दीया जलाकर, अपने घरों को फूलों से सजाकर भगवान बुद्ध के उपदेश पढ़ते हैं। अब आपको हम भगवान बुद्ध के प्रसिद्ध उपदेशों के बारे में बताते हैं और अपने जीवन में उतारने का संकल्प लेते हैं।
- सत्य की राह पर चलें– गौतम बुद्ध ने कहा हा कि दुनिया में तीन चीजें कभी नहीं छिप सकती पहला सुूर्य, दूसरा चंद्रमा और तीसरा सत्य। जैसे रोज सुबह सूरज और रात को चंद्रमा अपना प्रकाश हम पर ड़ालते हैं ठीक वैसे ही कभी न कभी छिपाया हुआ सत्य एक दिन अपना प्रकाश डालता है। तभी उन्होंने इंसान को असत्य की राह पर न चलने को कहा है।
- जीवन में उचित उद्देश्य रखें- जीवन में एक सही राह पर चलना बहुत ही महत्वपूर्ण है, हर इंसान को अपना एक लक्ष्य बनाना चाहिए और उसी को पूरा करने में जुट जाना चाहिए।
- अपना मनोबल न गिराए- यदि जीवन में बुरा वक्त आता है तो उससे अपना मनोबल नहीं गिराना चाहिए और धैर्य से काम लेना चाहिए क्योंकि ध्यान में रहे किसी भी तरह का वक्त जीवन में सामान्य नहीं रहता।
- पशुओं को हानि न पहुंचाएं- इस संसार में मनुष्य की तरह जीवित हर एक जीव भगवान की रचना माना जाता है। पशुओं का अपने स्वार्थ या स्वाद के लिए उनका वध करना एक बहुत बड़ा पाप है। हमारे प्राचीन वेदों में इसकी निंदा की गई है ।
- स्वयं पर विजय– जीवन में दूसरों से तुलना करना और अपने आप को कम समझने से इंसान कभी खुश नहीं रह सकता। दूसरों को छोड़कर अपने पर ध्यान देने से इंसान जीवन में उन्नति की राह पर पहुंचता है।
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