नयी दिल्ली दिल्ली के चारों ओर किसान आंदोलन कारियों का जमावड़ा है। किसान दिल्ली जाने की जिद को लेकर अलग—अलग बॉर्डर पर जमें हुए हैं। बैठक दर बैठक हो रही है। कहीं ट्रैक्टर मार्च की तैयारी तो कहीं आंदोलनकारियों को दिल्ली न जाने देने की पुलिसिया तैयारी। कहीं आंसू गैस के गोले तो कहीं प्लास्टिक की गोली। इस बीच खबर ये भी आई कि इस आंदोलन के दौरान हार्ट अटैक से एक किसान और दम घुटने से एक सब इंस्पेक्टर की मौत हो चुकी है।
दोनो के अपने—अपने दावें हैं। किसान संगठन कह रहे हैं कि किसानों के मंच पर किसी भी सियासी पार्टी को समर्थन नहीं दिया जाएगा। क्योंकि बीते 75 सालों में किसी भी सरकार ने किसानों की मांगों को पूरा नहीं किया। वहीं सरकार का दावा है कि मोदी सरकार ने किसानों की आमदनी दुगुनी हो सके इस दिशा में काफी पहल की है और उसका फायदा भी मिला है।
लेकिन भले ही बोर्डर पर तनाव है लेकिन दिल्ली के अंदरूनी हिस्से यानी भारत मंडपम में सबकुछ खुशनुमा दिख रहा है। मंच सजाये गये हैं। प्रधानमंत्री आये और उनकी अगवानी में भाजपा अध्यक्ष सहित समूची भाजपा खड़ी दिखाई दी। हो भी क्यों न लोकसभा चुनाव सर पर है। राजनीतिक दल माथापच्ची में लगे हुए हैं और इसी क्रम में देश की राजधानी दिल्ली में बीजेपी का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन चल रहा है। जाहिर है भाजपा के सबसे बड़े प्रचारक और देश के प्रधानमंत्री वहां आयें और पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को जीत का मंत्र दें।
प्रधानमंत्री आये भी और कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपने को पूरा करते हुए कश्मीर से 370 हटाया गया। साथ ही यह भी दुहराया कि इस बार लक्ष्य 370 सीटों का है यानी 370 सीटों पर कमल खिलाना है और एनडीए को 400 के पार जाना है। जाहिर है इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए पार्टी नेताओं की तरफ से 10 साल की उपलब्धियां गिनाई जाये। तो प्रधानमंत्री सहित तमाम भाजपा नेताओं ने मोदी सरकार की 10 साल की उपलब्धियां और खासकर गरीब कल्याण योजनाओं से हुए लाभ को कैसे जनता तक पहुंचाया जाये और भारत मंडपम में अधिवेशन में शामिल हो रहे 11 हजार से अधिक प्रतिनिधी कैसे इ को इन उपलब्धियों को बूथ स्तर तक ले जायें इस पर मंथन स्वाभाविक है।
ये दो दृश्य दिल्ली एनसीआर के हैं जहां एक ओर कमल खिलाने की तैयारी है वहीं दिल्ली के बोर्डरों पर कांटे लगाये गये हैं ताकि किसान दिल्ली में प्रवेश न कर सकें और जश्न में खलल न पैदा हो।
बोर्डर पर बिछाये जा रहे हैं कांटे..अंदरूनी दिल्ली में कैसे खिले कमल, जारी है मंथन