PM Modi Speech In RajyaSabha: संसद के बजट सत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अभिभाषण दिया था। जिसके बाद देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अंतरिम बजट पेश किया था। आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर राज्यसभा में जवाब दे रहे हैं। इससे पहले पीएम ने 5 दिसंबर को लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव को लेकर संबोधन दिया था।
इस दौरान पीएम ने लोकसभा में कहा था कि मेरा और देश का विश्वास पक्का हो गया है कि विपक्ष ने लंबे समय तक वहीं रहने का संकल्प लिया है। कांग्रेस एक प्रॉडक्ट को बार-बार लॉन्च करने के चक्कर में पतन के दौर से गुजर रही है। कांग्रेस ने देश में सिर्फ परिवारवाद को बढ़ावा दिया है।
आरक्षण को लेकर कांग्रेस पर हमला
आज राज्यसभा में भी पीएम ने कांग्रेस को निशाने पर लिया। प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर एसएसी/एसटी और ओबीसी को आरक्षण नहीं देने पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस ने सात दशकों तक उनके अधिकारों से वंचित रखा था। धारा 370 को निरस्त किया गया, तब जाकर उन्हें वो अधिकार मिले हैं।
जम्मू-कश्मीर में उन्हें कई अधिकार नहीं थे, जो हमने उन्हें धारा 370 हटाकर दिए। पीएम मोदी ने कहा, एससी समुदाय में सबसे पीड़ित वाल्मीकि समुदाय रहा है। उन्हें 7 दशक के बाद भी जम्मू-कश्मीर के लोगों की सेवाएं करते रहे, लेकिन स्थानीय मूल निवास का अधिकार नहीं दिया गया। मैं आज देश को बताना चाहता हूं कि स्थानीय निकायों में ओबीसी आरक्षण का विधेयक लोकसभा में पारित हो गया है।
आगे अपने संबोधन में पीएम ने कहा कि सीताराम केसरी अति पिछड़ी जाति से थे, कांग्रेस के अध्यक्ष थे, उन्हें उठाकर फुटपाथ पर फेंक दिया गया। ये वीडियो देश ने देखा था। इनके मार्गदर्शक अमेरिका में बैठे हैं। वो पिछले चुनाव में ‘हुआ तो हुआ’ के लिए फेमस हो गए थे। कांग्रेस इस परिवार के काफी करीब है। उन्होंने संविधान निर्माता अंबेडकर के योगदान को छोटा करने का भरपूर प्रयास किया।
पीएम ने पढ़ी नेहरू जी की चिट्ठी
इसके आगे पीएम मोदी ने कहा, कांग्रेस इन दिनों जाति की बात कर रही है। क्यों जरूरत पड़ गई इनको, मैं नहीं जानता हूं। पहले उन्हें अपने गिरेवान में झांकने की जरूरत है। दलित, पिछड़े और आदिवासी कांग्रेस जन्मजात से उनकी सबसे बड़ी विरोधी रही है। मैं सोचता हूं कि बाबा साहेब नहीं होते तो एसएसी/एसटी को आरक्षण मिलता या नहीं मिलता।
इनकी सोच आज से नहीं, उस समय से ऐसी है, मेरे पास प्रमाण है। बातें जब वहां से उठी हैं, तो उन्हें तैयारी रखनी चाहिए। मैं आदरपूर्वक नेहरू जी को बहुत याद करता हूं। एक बार नेहरू जी ने मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी लिखी थी। उन्होंने लिखा कि मैं किसी भी आरक्षण को पसंद नहीं करता और खासकर नौकरी में आरक्षण तो कतई ही नहीं। मैं ऐसे किसी भी कदम के खिलाफ हूं जो अकुशलता को बढ़ावा दें, जो दोयम दर्जे की ओर ले जाएं।