नयी दिल्ली: बिहार में ठाकुर के कुंआ से शुरू हुआ सियासी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस विवाद को लेकर जब राजद सुप्रीमो लालू यादव ने मनोज झा का पक्ष लेते हुए आनंद मोहन व उनके विधायक बेटे चेतन आनंद को नसीहत दे डाली तो पलटवार की बारी आनंद मोहन की थी।
क्या कहा लालू ने? मीडिया ने जब मनोज झा के बयान को लेकर सवाल पूछा तो लालू यादव ने कहा कि मनोज झा बहुत विद्वान आदमी हैं। उन्होंने जो कहा वह सही ही कहा होगा। उन्होंने कहा कि मनोज झा ने कहीं राजपूत का नाम नहीं लिया। लालू यादव ने बिना नाम लिए आनंद मोहन को नसीहत देते हुए कहा कि जो सज्जन निरीक्षण दे रहे हैं, उन्हें इनसब चीजों से परहेज करना चाहिए। लालू ने कहा कि मनोज ने जो कहा है, सही कहा है।
आनंद मोहन का पलटवार
अब पलटवार करने की बारी आनंद मोहन की थी। राजद सुप्रीमो लालू यादव को भी इशारों-इशारों में संदेश दे दिया है। आनंद मोहन ने कहा है कि अगर हम किसी के साथ हैं, तो इसका मतलब ये नहीं कि हम राजनीतिक तौर पर भिखमंगा हैं। अगर आप आप हमें एक या दो विधानसभा सीट पर समर्थन करेंगे तो हम 243 विधानसभा सीट पर हमारा समर्थन करेंगे। अगर आप एक लोकसभा सीट पर हमें समर्थन करेंगे तो हम आपको 40 लोकसभा सीट पर समर्थन करेंगे। हम अन्याय के खिलाफ लड़ने वालों में है। और मरते दम तक कमजोर और अन्याय के खिलाफ लड़ते रहेंगे। इसलिए हम इसकी परवाह नहीं करते कि कोई कौन सी पार्टी किसके साथ खड़ा है।
आपको बता दें कि आपको बता दें महिला आरक्षण बिल पर बहस के दौरान राजद सासंद मनोज झा ने ठाकुर का कुंआ कविता का पाठ किया था। और अंदर के ठाकुर को मारने की बात कही थी।
जाहिर है इस विवाद ने बिहार के सियासत में भूचाल ला दिया है। अभी भले ही जदयू तमाशबीन बनी दिख रही है और राजद के साथ खड़े होने का दिखावा कर रही है लेकिन इस मसले पर सभी दलों के ठाकुर नेताओं में एक खास तरह का एका दिख रहा है। इससे बिहार की सियासत उबलने लगी हे।