शुभम रावत-
नई दिल्ली: आज संसद का मॉनसून सत्र का 9वां दिन है। विपक्ष के द्वारा केंद्र सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की तारीख तय हो गई है। एक सप्ताह बाद 8 अगस्त को इस पर चर्चा शुरू होगी।
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की तारीख तय
मंगलवार को संसद की कार्यवाही 11 बजे से शुरू हुई। पिछले दिनों की तरह आज भीणिपुर मुद्दे को लेकर विपक्षी पार्टियों ने दोनों सदनों में नारेबाजी के साथ हंगामा करना शुरू कर दिया। कांग्रेस समेत समूचा विपक्ष मणिपुर के मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर अड़ा हुआ है। वहीं सरकार का कहना है कि विपक्ष इस मुद्दे पर चर्चा करने से भाग रहा है। इसी बीच विपक्ष केंद्र सरकार के खिलाफ सदन में अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई। जिसपर चर्चा की तारीख तय की गई है।
10 अगस्त को पीएम मोदी देंगे जवाब
लोकसभा के चेयरमैन ओम बिरला ने कहा,यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पिछले 8 दिनों से एक ही मुद्दे पर सदन में हंगामा हो रहा है और कार्यवाही नहीं चल पा रही है। विपक्ष द्वारा केंद्र सरकार के खिलाफ लाए गएअविश्वास प्रस्ताव पर 8 से 10 अगस्त तक चर्चा चलेगी। इन दो दिनों की चर्चा के बाद 10 अगस्त को पीएम मोदी अविश्वास प्रस्ताव पर जवाब देंगे।
पीएम मोदी सदन के अंदर अपनी बात रखें
अविश्वास प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि जिस दिन से सदन की शुरुआत हुई विपक्ष की ओर से एक ही मांग हो रही है कि प्रधानमंत्री सदन में आए और मणिपुर जैसे ज्वलंत और गंभीर मुद्दे पर सदन के अंदर अपनी बात रखें, बाहर नहीं। यही मांग शुरू के दिन से कर रहा हूं और जब हमारी मांग को ठुकराया तो हमें लगा कि प्रधानमंत्री हमारे कहने से सदन में नहीं आएंगें। इसलिए फिर अविश्वास प्रस्ताव लाने का सहारा लेना पड़ा। क्योंकि नियमों के मुताबिक, अविश्वास प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह सदन के अंदर आकर अपनी बात रखें।
27 अविश्वास प्रस्ताव के दौरान ऐसा कभी नहीं हुआ
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने आगे कहा कि हमें इस बात का यकीन था कि जब अविश्वास प्रस्ताव पर नोटिस दिया जाता है तो स्पीकर उसको संज्ञान लेते हैं, लेकिन हम उसके बाद से देख रहे हैं कि सरकार बिल पर बिल पास कराए जा रहे हैं, वह भी बिना चर्चा किए। नियमों के के मुताबिक यह ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद इस सदन में 27 बार अविश्वास प्रस्ताव पेश किए गए हैं, कभी ऐसा नहीं हुआ है जैसा अब हो रहा है। दो बार ही विधेयक को पारित तब किया गया है, जब सरकार ने विपक्ष को संज्ञान में लिया और उनसे बात करके किया है।