अमरनाथ यात्रा पर आतंकी हमले की आशंका, जानिये कब-कब रची आतंकियों ने नापाक साजिश

पहलगाम: जम्मू कश्मीर पुलिस के लिए फिर से अमरनाथ यात्रा को सुरक्षित रखने का चैलेन्ज होगा। दरअसल खुफिया अलर्ट जारी हुआ है कि अमरनाथ यात्रा पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई आतंकी संगठनों के साथ मिल कर बड़े हमले को अंजाम दे सकती है।

30 से 40 आतंकी हैं फिराक में

सूत्रों का कहना है कि सियालकोट के नजदीक शकरगढ़, पुंछ में बिंबर, मीरपुर और कोटली आदि में 30 से 40 प्रशिक्षित आतंकियों को तैयार किया गया है। यह आतंकी अगले 15 से 20 दिनों में कभी भी कहीं से घुसपैठ करने का प्रयास कर सकते हैं।

जैश-ए-मोहम्मद दे रहा प्रशिक्षण

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की मदद से सीमा पर बैठे आतंकी संगठनों ने आगामी श्री अमरनाथ यात्रा में खलल डालने के लिए साजिश रचनी शुरू कर दी है। आईएसआई के कहने पर पाकिस्तानी रेंजरों और पाकिस्तानी सैनिकों के बंकरों में लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षित आतंकियों को पनाह दी गई है।

कई बार हो चूका है प्रयास

बता दें कि पिछले तीन दिन में पुंछ और सांबा जिलों की एनओसी और बार्डर पर दो बार घुसपैठ का प्रयास हो चुका है। पुंछ तो घुसपैठ करने आए तीन आतंकी जिंदा दबोचे गए। इनके पास से 10 किलो आईईडी मिली थी। इससे साफ पता चलता है कि आतंकी बड़ी साजिश को अंजाम देने की फिराक में थे।

अमरनाथ यात्रा पर कब-कब हुआ आतंकी हमला

-1980 के दशक के आखिर में कश्मीर में पाकिस्तान की शह पर आतंकवाद का उभार हुआ। आतंकियों ने साल 1993 में पहली बार अमरनाथ यात्रा को निशाना बनाया। लेकिन अमरनाथ यात्रा उस सबसे बड़ा हमला हुआ साल 2000 में. जिसमें 32 श्रद्धालुओं की जान गई।

-1993: पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन हरकत उल अंसार और लश्कर ए तैय्यबा की लगातार धमकियों के बीच 1993 में अमरनाथ यात्रा पर पहला हमला हुआ था। उस साल हुए दो हमलों में तीन लोगों ने अपनी जान गंवाई।

-वर्ष 1994 में भी अमरनाथ यात्रा पर एक आतंकी हमला हुआ। जिसमें दो अमरनाथ यात्रियों को अपनी जान गंवानी पड़ी।

-अमरनाथ यात्रियों पर तीसरा हमला 1995 में हुआ। उस साल अमरनाथ यात्रियों पर तीन हमले हुए, हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ।

-साल 1996 में फिर अमरनाथ यात्रियों पर दो हमले हुए। लेकिन जान-माल का नुकसान नहीं हुआ।

-आतंकियों ने साल 2000 में अमरनाथ यात्रा पर सबसे बड़ा हमला किया। आतंकियों ने 2 अगस्त 2000 को अमरनाथ यात्रियों के पहलगाम बेस कैंप में अंधाधुंध फायरिंग की। इस हमले में 32 श्रद्धालु, स्थानीय दुकानदार और पोर्टरों की जान गई। इस बर्बर आतंकी हमले में 60 से अधिक लोग घायल भी हुए। इस हमले के पीछे आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा का हाथ बताया गया।

-20 जुलाई 2001 को आतंकियों ने पहलगाम बेस कैंप से आगे शेषनाग लेक के पास अमरनाथ यात्रियों के एक कैंप पर दो हथगोले फेंके। जिसमें 12 लोगों की मौत हुई और 15 लोग घायल हुए थे।

-30 जुलाई 2002 को आतंकियों ने श्रीनगर में अमरनाथ यात्रा के लिए जा रहे श्रद्धालुओं की प्राइवेट टैक्सी पर हमला किया। इस हमले में दो यात्रियों की मौत हो गई और दो लोग घायल हुए।

-पहलगाम के ननवान कैंप के पास लश्कर के आतंकियों ने 6 अगस्त 2002 को ग्रेनेड फेंका और गोलीबारी की। इस हमले में 9 लोगों की मौत हुई और 27 लोग घायल हुए।

-साल 2006 में आतंकियों ने फिर अमरनाथ यात्रा को निशाना बनाया। आतंकियों ने अमरनाथ यात्रियों की बस पर ग्रेनेड फेंका. जिसमें एक श्रद्धालु की मौत हो गई थी।

-10 जुलाई 2017 को फिर आतंकियों ने अमरनाथ यात्रा को निशाना बनाया। अनंतनाग में आतंकियों ने अमरनाथ यात्रियों की बस पर अंधाधुंध फायरिंग की। जिसमें 7 अमरनाथ यात्रियों की मौत हो गई और 32 लोग घायल हुए।

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