पटना: वैसे तो हर घर में अनाज होता है, हर व्यक्ति अनाज ग्रहण करती है, लेकिन उस अनाज को उगाने के लिए कितनी मेहनत लगती है ये सिर्फ एक किसान ही जानता है। अनाज को उगाने के लिए सिंचाई की आवश्यकता होती है। लेकिन आए दिन देश में किसानों के लिए सिंचाई एक बड़ी चुनौती से रूप में सामने आ रही है। इससे फसल उत्पादन पर भी प्रभाव पड़ रहा है। सिंचाई की समस्या से फसल उत्पादन में लगातार गिरावट आ रही है। इसी समस्या को निपटाने के लिए बिहार कुमार ने प्रदेश के किसानों के लिए एक बड़ा कदम उठाया है।
दरअसल, बिहार सरकार ने4500 नलकूप देने का फैसला कियाहै। चूंकि बिहार के कई हिस्से कहीं बाढ़ से प्रभावित रहते हैं तो कहीं इतना सूखा पड़ता है कि किसानों को अपनी फसल और मेहनत दोनों से हताश होना पड़ता है। इससे उनकी पूंजी तो खपत होती ही है, साथ ही फसल से भी हाथ धोना पड़ता है। इस गंभीर समस्या पर चिंतन करते हुए बिहार सरकार ने किसानों को जल स्त्रोत के लिए4500 नलकूप देने का फैसला कियाहै। इससे किसान सिंचाई की समस्या को निपटा सकते हैं।
बता दें कि सरकार किसानों को सूक्ष्म सिंचाई के अंतर्गत ड्रिप सिंचाई तकनीक, मिनी और माइक्रो स्प्रिंकलर के अतिरिक्त पोर्टेबल स्प्रिंकलर सिंचाई तकनीक को अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।इसे अपनाने के लिएसरकार किसानों को अतिरिक्त टप-अप राशि के जरिए 90 प्रतिशत सब्सिडी भी उपलब्ध करा रही है।
वहीं, अगर ड्रिप सिंचाई तकनीक अपनाने वाले कम से कम पांच किसानों के समूह द्वारा ढाई हेक्टेयर में खेती की जाती है तो सात निश्चय-2 योजना के तहत बिहार सरकार किसानों को जल स्त्रोत के लिए 80 प्रतिशत सब्सिडी पर सामूहिक नलकूप की व्यवस्था देगी। बता दें कि बिहार सरकार जरूरतमंद किसानों को इस योजना के तहत बोरिंग कराने के लिए 80% तक की सब्सिडी प्रदान करती है।
बिहार सरकार द्वारा लाए गए इस योजना के तहत किसान समूह अपनी ओर से केवल 20% की लागत राशि लगाकर बोरिंग करा सकते हैं। बता दें कि अपनी ओर से लगाई गई राशि केवल एक किसान नहीं देगा। चूंकि इस योजना का लाभ कोई व्यक्तिगत किसान नहीं बल्कि किसान समूह को दिया जाएगा तो सब्सिडी के अलावा लगने वाली राशि को किसान आपस में कंट्रीब्यूट करके लगाएंगे।