नई दिल्ली: एक तरफ जहां ब्रिटेन में भारतीय मूल के ऋषि सुनक प्रधानमंत्री की कमान संभाल रहे हैं वहीं, भारतीय मूल के 43 वर्षीय लियो वराडकर 30 महीनो के अंतराल के बाद दूसरी बार आयरलैंड के प्रधानमंत्री बने हैं।वराडकर आयरलैंड के प्रधानमंत्री और उप-प्रधानमंत्री भी रह चुके हैं। आयरलैंड के प्रधानमंत्री बनने के बाद पीएम नरेन्द्र मोदी ने उन्हें ट्वीट कर बधाई दी। बता दें लियो वराडकर आयरलैंड के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री हैं।
दरअसल, साल 2020 में आयरलैंड में हुए चुनाव के बाद दो मुख्य पार्टियों ने मिलकर सरकार बनाई थी। तब यह तय हुआ था कि दो-दो साल के लिए दोनों पार्टियों से प्रधानमंत्री रहेंगे। इसी डील के तहत माइकल मार्टिन प्रधानमंत्री बने थे। अब दो साल पूरा होने के बाद लियो वराडकर एक बार फिर से प्रधानमंत्री बन गए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय मूल के लियो वराडकर को दूसरे कार्यकाल के लिए आयरलैंड के पीएम के रूप में कार्यभार संभालने पर बधाई दी। उन्होंने एक ट्वीट में, ने कहा कि वह भारत और आयरलैंड के बीच ऐतिहासिक संबंधों, साझा संवैधानिक मूल्यों और बहुआयामी सहयोग को महत्व देते हैं और साथ मिलकर काम करने के लिए तत्पर हैं।
वराडकर दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने हैं। 2020 में हुए चुनावों के बाद यहां की फाइन गेल पार्टी , फिएना फेल पार्टी और ग्रीन पार्टी के बीच सरकार बनाने के लिए गठबंधन हुआ था। गठबंधन बनाने से पहले ही एक ऐतिहासिक समझौता हुआ था कि इनमें से दो पार्टियों के लीडर आधे-आधे समय के लिए प्रधानमंत्री बनेंगे। पांच साल के कार्यकाल के शुरुआती ढाई साल में मार्टिन देश के प्रधानमंत्री और वराडकर उप प्रधानमंत्री रहेंगे। इसके बाद दोनों एक दूसरे की जगह लेंगे। ऐसे में वराडकर अब फिएना फेल के माइकल मार्टिन से पदभार संभालेंगे।
ताओसीच (Taoiseach) या आयरलैंड के प्रधानमंत्री के रूप में अपने स्वीकृति भाषण में वराडकर ने आर्थिक अवसर और सभी के लिए एक उचित शुरुआत की पेशकश करते हुए सरकार के शेष कार्यकाल के दौरान आवास और रहने की लागत के संकट से निपटने का वादा किया।
43 वर्षीय वराडकर ने 2017 और 2020 के बीच प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। वह देश के सबसे कम उम्र के ताओसीच और पहले खुले तौर पर समलैंगिक प्रधान मंत्री हैं। वह 38 वर्ष की आयु में देश के सबसे कम उम्र के ताओसीच या प्रधानमंत्री बन गए थे।
वराडकर का जन्म डबलिन में एक आयरिश मां के यहाँ हुआ था जो एक नर्स के रूप में काम करती थीं। वहीं उनके पिता अशोक भारतीय प्रवासी थे। वो पेशे से डॉक्टर थे और 1960 के दशक में इंग्लैंड की नेशनल हेल्थ सर्विस में काम करते थे। अशोक महाराष्ट्र में सिंधुदुर्ग जिले के वराड गांव से थे और मुंबई में रहते थे।
लियो वराडकर का परिवार 1960 के दशक में आयरलैंड में बस गया। वराडकर ट्रिनिटी कॉलेज डबलिन से मेडिकल की डिग्री हासिल करने के बाद, वह प्रैक्टिस करने लगे लेकिन राजनीति में भी सक्रिय हो गए। 2019 में वो अपने परिवार के साथ सिंधुदुर्ग में अपने पैतृक गांव भी आए थे।