नई दिल्ली: दिल्ली नगर निगम चुनाव में इस बार कूड़े का ढ़ेर मुद्दा बन गया है। सभी वार्डों के उम्मीदवार प्रदेश की जनता को कूड़े की समस्या के निजात दिलाने का वायदा करके अपने लिए वोट मांगते हुए नजर आ रहे हैं।
दिल्ली एमसीडी चुनाव में शुक्रवार को प्रचार-प्रसार खत्म हो गया है। अब दो दिन बाद यानि चार दिसंबर को मतदान होगा। राजधानी के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और बीजेपी के बीच सीधे टक्कर नजर आ रही है। आप के नेता कूड़े के मुद्दे को लेकर बीजेपी पर लगातार हमलावार नजर आ रहे हैं।
दिल्ली के 250 वार्डों के 1349 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर है। जिसके लिए आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी कूड़े के मुद्दे को एमसीडी चुनाव में भुनाने की पूरी कोशिश कर रही है। इसीलिए एमसीडी चुनाव प्रचार में भी आप ने यह मुद्दा पूरे जोर शोर से उठाया और बीजेपी पर जमकर हमला किया। कूड़े के मुद्दे को आप पार्टी अब जनसंवाद कार्यक्रम के माध्यम से लोगों के घरों तक पहुंच रही है। आप के नेताओं का कहना है कि, बीजेपी ने पिछले 15 सालों में राजधानी में कूड़े का ढ़ेर इक्ठ्ठा कर दिया है जिसे हम चुनाव जीतने के बाद साफ कर देंगे।
लेकिन सवाल यह है कि कूड़े के मुद्दे को दिल्ली के एमसीडी चुनाव में मुद्दा क्यों बनाया जा रहा है, जबकि यह समस्या महाराष्ट्र, यूपी, कोलकाता समेत देश के अन्य राज्यों में भी हैं।
जनता के जरिए फैली समस्या का कैसे होगा निदान
कूड़े के ढ़ेर सिर्फ अकेले राजधानी दिल्ली में ही नहीं नजर आते हैं, बल्कि आप देश के किसी भी प्रदेश और शहर में चले जाइए यह समस्या हर जगह आम है। यह समस्या देश की जनता ने ही पैदा की है और इस समस्या का निदान भी उसी जनता को चाहिए। देश के नागरिक होने के नाते हमारी यह जिम्मेदारी है कि साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए। इसे समस्या का समाधान कैसे होगा यह हम सभी को मिलकर सोचना होगा। इसे चुनावी मुद्दा बनाकर वोट मांगने और मतदान देने के बजाय इस बात पर विचार करना चाहिए कि कैसे कूड़े और गंदगी को हम तकनीक के माध्यम से समाप्त या कम कर सकते हैं।