नाटककार, अभिनेता, निर्देशक एवं ज्ञानपीठ से सम्मानित गिरीश कर्नाड का सोमवार को यहां उनके आवास पर निधन हो गया। वह 81वर्ष के थे।
अपने विचारों को खुल कर प्रकट करने को लेकर निशाने पर रहे बहुआयामी व्यक्तित्व और बहुमुखी प्रतिभा के धनी कर्नाड के परिवार में पत्नी सरस्वती, बेटे रघु कर्नाड (पत्रकार एवं लेखक) और बेटी राधा हैं।
कनार्ड के परिवार से जुड़े सूत्रों ने कहा, उन्होंने सुबह करीब आठ बजे आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से श्वास संबंधी तकलीफ सहित कई बीमारियों से पीड़ित थे।
परिवार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि उनका अंतिम संस्कार आज कल्पली विद्युत शवदाहगृह में किया जाएगा। उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।
उनकी इच्छानुसार परिवार ने किसी भी रीति-रिवाज का पालन नहीं करने का निर्णय लिया है।
परिवार ने प्रशंसकों और गणमान्य हस्तियों से भी सीधे शमशान पहुंच ही उन्हें अंतिम विदाई देने की अपील की है।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने कर्नाड के सम्मान में सोमवार को छुट्टी रहने का ऐलान करते हुए तीन दिन का शोक भी घोषित किया है।
सीएमओ ने कहा कि कर्नाड को राजकीय सम्मान दिया जाएगा, जो ज्ञानपीठ से सम्मानित लोगों को दिया जाता है।
कर्नाड के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने कहा कि हमने एक सांस्कृतिक दूत खो दिया।
उन्होंने ट्वीट किया, ज्ञानपीठ साहित्यकार, प्रतिष्ठित अभिनेता एवं फिल्म निर्माता श्री गिरीश कर्नाड के निधन की खबर सुन कर मैं दुखी हूं।
उन्होंने कहा, साहित्य, थिएटर और फिल्मों में उनके बहुमुल्य योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। उनके निधन से हमने एक सांस्कृतिक दूत खो दिया। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।
पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देव गौड़ा ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि कन्नड़ भाषा को उन्होंने ही सातवां ज्ञानपीठ दिलाया था।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी एस येदियुरप्पा ने एक ट्वीट कर कहा, जाने-माने अभिनेता-नाटककार एवं ज्ञानपीठ से सम्मानित गिरीश कर्नाड के निधन की खबर सुन कर दुखी हूं। उनके परिवार के साथ मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी कर्नाड का जन्म डॉ. रघुनाथ कर्नाड और कृषणाबाई के घर 1938में हुआ था।
कर्नाड को अनेक नाटकों और फिल्मों में अभिनय किया जिनकी काफी सराहना हुई।
ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किए जा चुके कर्नाड को 1974में पद्म श्री और 1992में पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया। वह 1960के दशक में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के रोहड्स स्कॉलर भी रहे। उन्होंने वहां से दर्शनशास्त्र, राजनीति शास्त्र और अर्थशास्त्र में मास्टर ऑफ आर्ट्स की डिग्री हासिल की।
उनके कन्नड़ भाषा में लिखे नाटकों का अंग्रेजी और कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया गया।
उन्होंने मशहूर कन्नड़ फिल्म संस्कार (1970) से अभिनय और पटकथा लेखन के क्षेत्र में पदार्पण किया। यह फिल्म यू आर अनंतमूर्ति के एक उपन्यास पर आधारित थी। फिल्म का निर्देशन पट्टाभिराम रेड्डी ने किया और फिल्म को कन्नड़ सिनेमा के लिए पहला राष्ट्रपति गोल्डन लोटस पुरस्कार मिला।
उन्होंने बतौर अभिनेता सिनेमा में अपने करियर की शुरुआत की लेकिन उन्हें लेखक और विचारक के रूप में जाना जाता है।
कर्नाड अपनी पीढ़ी की सर्वाधिक प्रतिष्ठित कलात्मक आवाजों में से एक थे।
वह प्रतिष्ठित नाटककार थे। उनके नाटक नागमंडल, ययाति और तुगलक ने उन्हें काफी ख्याति दिलाई।
उन्होंने स्वामी और निशांत जैसी हिंदी फिल्मों में भी काम किया।
उनके टीवी धारावाहिकों में मालगुडी डेज़ शामिल हैं जिसमें उन्होंने स्वामी के पिता की भूमिका निभाई। वह 90के दशक की शुरुआत में दूरदर्शन पर विज्ञान पत्रिका टर्निंग प्वाइंट के प्रस्तोता भी थे।
बाद में वर्षों में कर्नाड सलमान खान की टाइगर जिंदा है और अजय देवगन अभिनीत शिवाय जैसी व्यावसायिक फिल्मों में भी दिखाई दिए।
राजनीति की बात करें तो वह प्रधानमंत्री मोदी के भाजपा का एकमात्र चेहरा होने की काफी आलोचना करते रहे हैं।
भाषा