Iran-US War: ईरान ने अमेरिका के 9 पॉइंट प्लान के जवाब में भेजा 14 पॉइंट का प्रस्ताव, ट्रम्प ने दिया रिएक्शन

डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका के राष्ट्रपति।

Iran-US War: ईरान ने अमेरिका के 9-पॉइंट प्लान का जवाब देते हुए 14-पॉइंट प्रस्ताव भेजा है। तस्नीम न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के माध्यम से भेजे गए इस प्रस्ताव में ईरान ने युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने पर जोर दिया है। ईरान दो महीने के अस्थायी सीजफायर को ठुकराते हुए कह रहा है कि 30 दिनों के अंदर सभी मुद्दों का समाधान किया जाए। प्रस्ताव में युद्ध सभी मोर्चों (खासकर लेबनान) पर रोक, अमेरिकी नौसेना ब्लॉकेड हटाने, गैर-आक्रामक गारंटी, सैंक्शंस हटाने, फ्रोजन एसेट्स रिलीज और होर्मुज स्ट्रेट पर नया फ्रेमवर्क जैसे मुद्दे शामिल हैं।

ईरान ने ठुकराया अमेरिका का प्रस्ताव

ईरान का मानना है कि अस्थायी truce की बजाय स्थायी शांति और क्षेत्रीय स्थिरता पर ध्यान केंद्रित होना चाहिए। तस्नीम के मुताबिक, ईरान ने अमेरिकी प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए कहा कि दो महीने का सीजफायर पर्याप्त नहीं है। इसके बजाय 30 दिनों में युद्ध समाप्त करने और व्यापक समझौते पर जोर दिया गया है। यह प्रस्ताव ईरान की मजबूत स्थिति को दर्शाता है, जहां वह होर्मुज पर नियंत्रण और क्षेत्रीय प्रभाव बनाए रखना चाहता है।

ट्रंप की प्रतिक्रिया:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रस्ताव की समीक्षा करने की बात कही है। उन्होंने कहा, “मैं जल्द ही ईरान द्वारा भेजे गए प्लान की समीक्षा करूंगा।” लेकिन ट्रंप ने साफ तौर पर skepticism जताया। ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा कि वे कल्पना भी नहीं कर सकते कि यह प्रस्ताव स्वीकार्य होगा, क्योंकि ईरान ने पिछले 47 सालों में मानवता और दुनिया के खिलाफ जो किया है, उसकी पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई है। ट्रंप ने पहले के प्रस्ताव को भी खारिज किया था और कहा था कि वे “संतुष्ट नहीं” हैं।

ईरान पर सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला

ट्रंप ने ईरान पर दबाव बनाए रखते हुए सैन्य विकल्प खुले रखे हैं। हालांकि, तीन सप्ताह का सीजफायर फिलहाल कायम है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है। ईरान ने पाकिस्तान को मध्यस्थ बनाकर अपनी मजबूत शर्तें रखी हैं, जबकि ट्रंप प्रशासन पूर्ण समर्पण या बड़े दबाव की नीति पर अड़ा दिख रहा है।

ईरान-अमेरिका अपनी जिद पर अड़े

यह प्रस्ताव मध्य पूर्व में तनाव कम करने की दिशा में एक कदम हो सकता है, लेकिन दोनों पक्षों की कड़ी शर्तों के कारण समझौता मुश्किल लग रहा है। गैस कीमतें, क्षेत्रीय सुरक्षा और होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति इस डील के नतीजे पर निर्भर करेंगी।

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