पहलगाम हमले की बरसी पर सेना का कड़ा संदेश, कहा- सीमाएँ कभी पार नहीं करनी चाहिए भारत भूलता नहीं है

नई दिल्ली: पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी की पूर्व संध्या पर भारतीय सेना ने आतंकवाद के खिलाफ अपने रुख को एक बार फिर स्पष्ट और सख्त शब्दों में दोहराया है। सेना ने कहा कि जब मानवता की सीमाएँ पार की जाती हैं, तो जवाब निर्णायक होता है और भारत ऐसे किसी भी हमले को भूलता नहीं है।

आतंकवाद पर सेना का कड़ा रुख

भारतीय सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर संदेश जारी करते हुए लिखा कि जब इंसानियत की हदें पार की जाती हैं, तो उसका जवाब निर्णायक होता है और न्याय सुनिश्चित किया जाता है। सेना ने यह भी कहा कि देश एकजुट है और आतंकवाद के खिलाफ उसकी प्रतिबद्धता अडिग है।

सेना की इस पोस्ट के साथ एक विशेष पोस्टर भी साझा किया गया, जिसमें भारत के मानचित्र की छायांकित तस्वीर दिखाई गई थी। पोस्टर में लिखा था “कुछ सीमाएँ कभी पार नहीं की जानी चाहिए” और “इंडिया डज नॉट फॉरगेट (भारत भूलता नहीं है)”, जिसमें ‘क्रॉस्ड’ शब्द के ‘O’ को सिंदूर की कटोरी के रूप में दर्शाया गया था।

पहलगाम आतंकी हमला

पहलगाम आतंकवादी हमला 22 अप्रैल को हुआ था, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी। इनमें अधिकांश पर्यटक शामिल थे, जिससे पूरे देश में गहरा आक्रोश फैल गया था। इस हमले को भारत की सुरक्षा व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर चुनौती माना गया। हमले के बाद देशभर में शोक और गुस्से का माहौल था। सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत जांच शुरू की और आतंकियों के नेटवर्क को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ जुटाई गईं।

ऑपरेशन सिंदूर की जवाबी कार्रवाई

इस हमले के जवाब में भारत ने 7 मई की रात एक निर्णायक सैन्य कार्रवाई की, जिसे ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया। इस ऑपरेशन में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। सेना के अनुसार, इस कार्रवाई का उद्देश्य आतंकवाद के ढांचे को खत्म करना और भविष्य में ऐसे हमलों को रोकना था। कार्रवाई के बाद सेना ने संदेश दिया था कि “इंसाफ किया गया है। जय हिंद।”

भारत-पाक तनाव और स्थिति

इस सैन्य कार्रवाई के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। दोनों देशों के बीच जवाबी कार्रवाई का सिलसिला भी चला, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति संवेदनशील हो गई थी। हालांकि, 10 मई की शाम दोनों देशों के बीच एक समझौते के बाद सैन्य संघर्ष को रोक दिया गया। इसके बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हुई, लेकिन सुरक्षा एजेंसियाँ अब भी सतर्क बनी हुई हैं।

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