कुर्सियांग: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनने पर दशकों पुराने गोरखा मुद्दे को छह महीने के भीतर सुलझाने का वादा किया। उन्होंने कहा कि भाजपा ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जो गोरखाओं की समस्याओं का स्वीकार्य समाधान निकाल सकती है।
दार्जिलिंग जिले के कुर्सियांग में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि भाजपा गोरखाओं की आकांक्षाओं को समझती है और उनके अनुरूप समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा जताया कि राज्य में भाजपा की सरकार बनने के छह महीने के भीतर गोरखा समुदाय के चेहरों पर मुस्कान होगी।
दशकों से लंबित है मुद्दा
शाह ने कहा कि गोरखा मुद्दा लंबे समय से लंबित है क्योंकि पूर्व की सरकारें दार्जिलिंग पहाड़ियों के लोगों की उम्मीदों को पूरा करने में असफल रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने गोरखा समुदाय के साथ न्याय नहीं किया।
बैठकों में नहीं आया राज्य का प्रतिनिधि
गृह मंत्री ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने इस मुद्दे के समाधान के लिए कई प्रयास किए। उन्होंने बताया कि उन्होंने इस संबंध में तीन बैठकें बुलाई थीं, लेकिन ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने उनमें कोई प्रतिनिधि नहीं भेजा। इसके चलते इस मुद्दे के समाधान के लिए एक मध्यस्थ नियुक्त करना पड़ा।
सरकार बनने पर तेज कार्रवाई का वादा
शाह ने दोहराया कि भाजपा सरकार बनने के बाद गोरखा समुदाय की इच्छाओं के अनुरूप इस मुद्दे का समाधान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि छह महीने के भीतर ठोस कदम उठाए जाएंगे ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित हो सके।
मतदाता सूची का मुद्दा भी उठाया
उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान कुछ गोरखाओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का मुद्दा भी उठाया। शाह ने कहा कि भाजपा सरकार बनने के बाद ऐसे सभी नामों को फिर से सूची में शामिल किया जाएगा।
क्या है गोरखा मुद्दा
गोरखा मुद्दा उत्तर बंगाल के गोरखा बहुल पहाड़ी क्षेत्रों में अलग राज्य की लंबे समय से चली आ रही मांग से जुड़ा है। यह मुद्दा क्षेत्र की राजनीति और सामाजिक स्थिति पर गहरा प्रभाव डालता रहा है।