नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि जल जीवन मिशन की शुरुआत के बाद देश में ग्रामीण क्षेत्रों में नल से जल कनेक्शन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में जहां केवल 17 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के पास नल से जल कनेक्शन था, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 82 प्रतिशत हो गया है।
राष्ट्रपति मुर्मू बुधवार को आयोजित ‘जल महोत्सव’ कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि भारत में जल केवल एक बुनियादी सुविधा नहीं है, बल्कि यह देश की संस्कृति, परंपराओं, आजीविका और सामुदायिक जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ है।
जल जीवन मिशन की सफलता की सराहना
राष्ट्रपति ने इस उपलब्धि को एक बड़ी सफलता बताते हुए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल और उनकी पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि आज करोड़ों ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल घरों तक उपलब्ध हो रहा है, जो इस मिशन की प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाता है।
जल का भारतीय संस्कृति से गहरा संबंध
मुर्मू ने कहा कि भारतीय परंपराओं में जल को जीवन का आधार माना गया है और इसे कई रोगों के उपचार से भी जोड़ा गया है। उन्होंने उल्लेख किया कि हमारे राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का पहला शब्द ‘सुजलाम्’ है, जिसका अर्थ है ‘उत्तम जल संसाधनों से समृद्ध’।
महिलाओं और बच्चों को मिली राहत
राष्ट्रपति ने कहा कि पहले ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को पीने के पानी के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता था और महिलाओं व बच्चों को अक्सर लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। लेकिन अब घरों तक स्वच्छ जल पहुंचने से उनकी कठिनाइयों में काफी कमी आई है।
जल संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताया
राष्ट्रपति ने विश्व प्लंबिंग दिवस का उल्लेख करते हुए जल आपूर्ति व्यवस्था में प्लंबरों और तकनीशियनों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य धरोहर के रूप में सुरक्षित रखना होगा। मुर्मू ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘जल महोत्सव’ देश में जल संरक्षण और जल सुरक्षा के लिए जन आंदोलन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।