ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव अफसोसजनक, सदन में नियमों के विरुद्ध बोलने का अधिकार नहीं: अमित शाह

amit shah

नई दिल्ली: गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ संकल्प लाने को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष की निष्ठा पर सवाल उठाना अत्यंत अफसोसजनक है और इससे देश की लोकतांत्रिक परंपराओं को ठेस पहुंचती है।

लोकसभा में विपक्ष के संकल्प पर चर्चा का जवाब देते हुए शाह ने कहा कि सदन नियमों के अनुसार चलता है और किसी को भी नियमों के विरुद्ध बोलने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष के फैसले पर असहमति हो सकती है, लेकिन उनका निर्णय अंतिम होता है।

राहुल गांधी पर भी साधा निशाना

शाह ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के उस आरोप का भी जवाब दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया जाता। गृह मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी खुद ही कई महत्वपूर्ण चर्चाओं में हिस्सा नहीं लेते। उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार द्वारा लाए गए कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी मौजूद नहीं थे। शाह ने यह भी कहा कि पिछले साल शीतकालीन सत्र के दौरान राहुल गांधी जर्मनी की यात्रा पर थे। शाह ने कहा, “जब-जब महत्वपूर्ण सत्र होता है, उनका विदेश दौरा होता है। जब आप विदेश में हैं तो आप कैसे बोलेंगे? यहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का प्रावधान नहीं है।”

लोकतांत्रिक परंपराओं पर सवाल उठाना गलत

गृह मंत्री ने कहा कि जब सदन के मुखिया की निष्ठा पर सवाल उठाए जाते हैं, तो इससे दुनिया में भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया की साख प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि सदन आपसी विश्वास से चलता है और पक्ष-विपक्ष दोनों के लिए लोकसभा अध्यक्ष संरक्षक की भूमिका निभाते हैं।

शाह ने कहा कि सदन कोई मेला नहीं है और इसे नियमों के अनुसार ही चलाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई सदस्य नियमों के खिलाफ बोलता है तो लोकसभा अध्यक्ष को उसे रोकने और आवश्यक होने पर सदन से बाहर करने का अधिकार है।

भाजपा ने कभी अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव नहीं लाया

गृह मंत्री ने कहा कि भाजपा और राजग विपक्ष में रहते हुए भी कभी लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाए। उनका कहना था कि उनकी पार्टी ने हमेशा अध्यक्ष पद की गरिमा को बनाए रखने का प्रयास किया है। उन्होंने यह भी कहा कि विशेषाधिकार के भ्रम में रहने वाले लोगों को न तो उनकी पार्टी और न ही जनता लंबे समय तक समर्थन देती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *