First Indian President to fly in Rafale: (अंबाला): राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को हरियाणा के अंबाला वायुसेना स्टेशन से राफेल लड़ाकू विमान में उड़ान भरी और इसे एक “अविस्मरणीय अनुभव” बताया। उन्होंने कहा कि इस उड़ान से उनके भीतर देश की रक्षा क्षमताओं के प्रति गर्व की नई भावना जगी है। उड़ान से पहले राष्ट्रपति मुर्मू ने राफेल की पायलट स्क्वाड्रन लीडर शिवांगी सिंह के साथ तस्वीर खिंचवाई। सिंह वही पायलट हैं जिन्हें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान राफेल उड़ाने के बाद पाकिस्तान समर्थक सोशल मीडिया हैंडल्स ने झूठा दावा करते हुए “पकड़े जाने” की अफवाह फैलाई थी। इस दावे को पत्र सूचना कार्यालय (PIB) ने 10 मई को फर्जी करार दिया था।

एयर चीफ भी पहुंचे उड़ान भरने
राष्ट्रपति के साथ-साथ वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने भी उसी एयरबेस से एक अलग राफेल विमान में उड़ान भरी। इस तरह राष्ट्रपति मुर्मू दो अलग-अलग लड़ाकू विमानों में उड़ान भरने वाली भारत की पहली राष्ट्रपति बन गई हैं।
पहले भी सुखोई-30 में भर चुकी हैं उड़ान
अप्रैल 2023 में राष्ट्रपति मुर्मू ने असम के तेजपुर वायुसेना स्टेशन से सुखोई-30 एमकेआई में उड़ान भरी थी। उनसे पहले डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (2006) और प्रतिभा पाटिल (2009) ने भी इसी विमान में उड़ान भरी थी।
राफेल में उड़ान का अनुभव
राफेल विमान में सवार होने से पहले राष्ट्रपति ने ‘जी-सूट’ पहना, हाथ में हेलमेट लिया और धूप का चश्मा लगाए एयर चीफ मार्शल एवं अन्य अधिकारियों के साथ फोटो खिंचवाईं। सुबह 11:27 बजे विमान ने उड़ान भरी और लगभग 30 मिनट तक उड़ान भरते हुए करीब 200 किलोमीटर की दूरी तय की। विमान ने 15,000 फुट की ऊंचाई पर और लगभग 700 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरी। इसे 17वीं स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज़’ के कमांडिंग ऑफिसर ग्रुप कैप्टन अमित गेहानी ने उड़ाया।
गार्ड ऑफ ऑनर और राष्ट्रपति की टिप्पणी
वापसी पर राष्ट्रपति को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। उन्होंने आगंतुक पुस्तिका (विजिटर बुक) में लिखा राफेल में उड़ान भरना मेरे लिए एक अविस्मरणीय अनुभव रहा। इस शक्तिशाली विमान ने मेरे भीतर देश की रक्षा क्षमताओं के प्रति गर्व की नई भावना जगाई है। मैं भारतीय वायुसेना और अंबाला वायुसेना स्टेशन की टीम को बधाई देती हूं।”
ऑपरेशन सिंदूर’राफेल की ‘भूमिका
फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन द्वारा निर्मित राफेल लड़ाकू विमान को सितंबर 2020 में अंबाला एयरबेस पर भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था। पहले पांच विमान 17वीं स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज़’ में शामिल किए गए थे, जो 27 जुलाई 2020 को फ्रांस से भारत पहुंचे थे। हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (7–10 मई) के दौरान, भारतीय वायुसेना ने राफेल विमानों का उपयोग पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाकों में आतंकी ढांचों को नष्ट करने के लिए किया था। चार दिन तक चली भीषण सैन्य झड़पों के बाद 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी।