Uttarakhand rescue: (उत्तरकाशी) उत्तराखंड के उत्तरकाशी ज़िले में हाल ही में बादल फटने और अचानक आई बाढ़ से मची भारी तबाही के बाद प्रशासन राहत और पुनर्वास कार्यों को तेज़ी से अंजाम दे रहा है। गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर गंगनानी के आगे लिम्चागाड़ के पास बेली पुल का निर्माण रविवार को अंतिम चरण में पहुंच गया है। इसके शुरू होने से धराली और आसपास के प्रभावित क्षेत्रों से दोबारा संपर्क स्थापित होने की उम्मीद है।
क्या होता है बेली पुल
बेली पुल एक अस्थायी, लेकिन मजबूत पुल होता है, जिसे पूर्व-निर्मित हिस्सों को जोड़कर कम समय में तैयार किया जाता है। इस पुल के बनने से राहत सामग्री, खाद्य आपूर्ति और अन्य ज़रूरी सहायता त्वरित रूप से प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाई जा सकेगी।
राहत कार्यों में जुटा प्रशासन
राज्य के गृह सचिव शैलेश बगौली ने निर्देश दिए हैं कि धराली में प्रतिदिन 2000 लीटर डीजल और रसोई गैस सिलेंडर की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। जब तक सड़कों की मरम्मत पूरी नहीं होती, तब तक ज़रूरी सामग्री घोड़ों और खच्चरों के माध्यम से पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
हेलीकॉप्टर से राहत और बचाव
रविवार को बारिश के कारण हेलीकॉप्टर संचालन देर से (9:45 बजे) शुरू हो सका। मातली हेलीपैड से राहत सामग्री को हेलिकॉप्टर के जरिए हर्षिल पहुंचाया गया। वापसी में आपदा प्रभावित लोगों को सुरक्षित रूप से बाहर लाया जा रहा है। अब तक 1000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
युद्द स्तर पर चल रहा काम
गंगोत्री राजमार्ग को सुचारू करने के लिए सोनगाड़, डबरानी, हर्षिल और धराली क्षेत्रों में युद्धस्तर पर काम चल रहा है। वहीं, धराली में लापता लोगों की तलाश में राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) के खोजी कुत्ते और आधुनिक उपकरण जैसे विक्टिम लोकेटिंग कैमरे, थर्मल इमेजिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
5 अगस्त को हुई थी तबाही
पांच अगस्त को खीर गंगा नदी में अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन ने धराली क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित किया। कई होटल और मकान पूरी तरह तबाह हो गए। जिला प्रशासन ने अब तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि की है, जबकि कई अब भी लापता हैं।