UN के 193 सदस्य देशों में से पाकिस्तान समेत तीन को छोड़ सबने किया ऑपरेशन सिंदूर का समर्थन: जयशंकर

एस जयशंकर, भारत के विदेश मंत्री।

नई दिल्ली:लोकसभा में सोमवार को विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने ऑपरेशन सिंदूर पर विपक्ष के भारत को दुनिया का समर्थन न मिलने वाले दावों को नकार दिया। उन्होंने साफ कहा कि संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से केवल पाकिस्तान और तीन सदस्य देशों ने ऑपरेशन सिंदूर का विरोध किया, जबकि बाकी सभी देशों ने समर्थन किया।

जयशंकर ने बताया ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य

लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान जयशंकर ने कहा कि इस कार्रवाई का उद्देश्य पाकिस्तान को यह संदेश देना आवश्यक था कि ऐसी हरकतों के दूरगामी परिणाम होंगे। इसलिए भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के साथ सिंधु जल संधि को स्थगित किया, अटारी सीमा को बंद किया और वैश्विक मंचों पर आतंकी हमले की स्पष्ट निंदा की। जयशंकर ने कहा कि चीन ने पाकिस्तान का समर्थन किया। यह साझेदारी 60 साल पुरानी है। जोकि कांग्रेस काल से चली आ रही है और इसमें नई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शामिल होने के बावजूद किसी अंतरराष्ट्रीय दबाव से भारत को रोक नहीं सका।

UNSC में की गई पहलगाम आतंकी हमले की निंदा

विदेश मंत्री ने बताया कि 26 अप्रैल के यूएनएससी के बयान में पहलगाम आतंकी हमले की तीव्र निंदा की गई और उसमें आतंकवाद के खिलाफ कठोर रुख दिखाया गया। इसके अलावा आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख और भारत की सुरक्षा के लिए ‘क्वाड’ और ‘ब्रिक्स’ जैसे मंचों में भी व्यापक समर्थन मिला। जयशंकर ने बताया कि अमेरिका ने 17 जुलाई को “द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ)” को वैश्विक आतंकवादी संगठन घोषित किया, जिसने पहलगाम हमले की जिम्मेदारी ली थी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय मुंबई हमला आरोपी तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण से संबंधित परिस्थितियों में आया।

पीएम मोदी की कूटनीतिक सफलता

जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीतियों और उनकी सरकार की रणनीतिक कार्रवाई बड़ी कूटनीतिक सफलता है। उन्होंने कहा कि उपग्रह तस्वीरों और अंतरराष्ट्रीय समर्थन से यह सिद्ध हुआ कि भारत ने आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए। वे बोले कि पाकिस्तान द्वारा प्रस्तावित संघर्षविराम की पेशकश किसी राजनीतिक दबाव पर नहीं, बल्कि भारत के संकल्पपूर्ण रुख का नतीजा थी। जब विपक्ष ने पूछा कि क्या प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के बीच कोई संवाद हुआ तो जयशंकर ने बताया कि 22 अप्रैल और 17 जून को दो फोन कॉल्स ज़रूर हुईं, लेकिन इन संवादों में कोई व्यापार या पारस्परिक समझौता नहीं हुआ।

अमित शाह ने भी दिखाया आइना

गृहमंत्री अमित शाह ने भी विपक्ष को कटाक्ष किया कि वे अपने ही विदेश मंत्री के बयान पर भरोसा नहीं करते। जयशंकर ने बताया कि पिछले दशक में सीमा सुरक्षा में सुधार हुआ है और भारत ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि आतंकवाद और बातचीत को एक साथ नहीं चलने देंगे। उन्होंने कहा कि भारत अब तय करता है कि खून और पानी कभी साथ नहीं बह सकते।

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