Parliament Session: ‘एक देश एक चुनाव’ पर बोलीं सरकार, यह कोई नई बात नहीं…विपक्ष के सामने रखा डाटा

Parliament Session One Nation One Election: मंगलवार को लोकसभा में एक देश एक चुनाव विधेयक पेश हो गया है। विधेयक के समर्थन में 269 और विरोध में 198 वोट पड़े हैं। अब इस बिल को जेपीसी के पास भेज दिया गया। विपक्ष के कड़ा विरोध करने के बाद सरकार ने एक बयान जारी कर कहा कि यह कोई पहली बार नहीं होगा और नहीं यह कोई नया कॉनसेप्ट है।

इससे पहले देश में संविधान लागू होने के बाद साल 1951 से लेकर 1967 तक एक साथ लोकसभा और विधानसभा के चुनाव होते रहे हैं। सरकार ने कहा कि 1951-52 में जब देश में पहली बार चुनाव हुए थे, तो लोकसभा और राज्यों की विधानसभा के लिए एक ही साथ वोट डाले गए थे।

बकौल बयान, यही प्रक्रिया साल 1957, 1962 और 1967 में भी जारी रही। हालांकि, 1968 और 1969 में कुछ राज्यों की विधानसभा के कार्यकाल पूर्ण होने से पूर्व ही भंग कर दिया गया था। जिसके बाद एक देश एक चुनाव का क्रम टूट गया। इसके बाद साल 1970 में भी लोकसभा चुनाव पहले ही करा लिया गया था। जिससे इस कॉनसेप्ट का क्रम टूट गया।

सरकार ने कहा कि पहली, दूसरी और तीसरी लोकसभा ने अपने 5 वर्षों का कार्यकाल पूरा किया, लेकिन पांचवीं लोकसभा का कार्यकाल इमरजेंसी के कारण 1977 तक बढ़ गया। तब से लेकर अब तक, केवल कुछ लोकसभा का कार्यकाल ही 5 वर्षों तक चल पाया, जबकि छठवीं, सातवीं, नौवीं, ग्यारहवीं, बारहवीं और 13वीं लोकसभा समय से पहले ही भंग हो गई।

बयान में ये भी कहा गया कि राज्य की विधानसभाओं को भी यही समस्या झेलनी पड़ी, जिसमें कुछ को समय से पूर्व भंग कर दिया गया, वहीं कुछ का कार्यकाल बढ़ाना पड़ा। इन्हीं वजहों से एक साथ हो रहे चुनाव का क्रम बिगड़ गया और वर्तमान में हर समय चुनाव होते रहने जैसी स्थिति पैदा हो गई।

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देशहित में कानून- सरकार

बता दें कि, वन नेशन-वन इलेक्शन पर बनी उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि एक साथ चुनाव से शासन चलाने में निरंतरता बनी रहती है। अभी देश में हर समय चुनाव होते रहते हैं। इससे केंद्र और राज्य सरकार समेत राजनीतिक पार्टियों और उनके नेताओं का ध्यान शासन से ज्यादा चुनाव की तैयारियों पर ज्यादा होता है।

ऐसे में बयान में वन नेशन-वन इलेक्शन का समर्थन करते हुए कहा गया है कि इससे सरकार का ध्यान विकास के कार्यों पर लगेगा और जनहित के कामों में तेजी आएगी। इसके साथ ही एक साथ चुनाव होने पर खर्च में कमी आएगी और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। एक देश एक चुनाव पूरी तरह से देशहित में हैं और इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।

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