Parliament Winter Session Constitution Debate Amit Shah: संसद के शीतकालीन सत्र में संविधान पर चर्चा का आज राज्यसभा में दूसरा दिन है। चर्चा के दूसरे दिन आज गृह मंत्री अमित शाह विपक्ष के सवालों का जवाब दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश कितना आगे बढ़ा, जनता को ये चर्चा इस बात का अहसास कराएगी। इस चर्चा में हम गहराई तक गए और हमारा लोकतंत्र पाताल की गहराई तक है।
ये भी साफ हुआ कि जब-जब जनता ने किसी पार्टी को जनादेश दिया तो उसने सम्मान किया या नहीं किया। संविधान पर चर्चा युवा पीढ़ी के लिए अच्छा है। इस देश की जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से अनेक तानाशाहों का अभिमान चूर-चूर करने का काम किया है। तीसरी बार देश की जनता जनार्दन ने हमें जनादेश दिया है।
अमित शाह ने संविधान सभा के सदस्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि इतने सारे मनीषियों का विचार जिसमें हो, उस संविधान को सफल होना ही था। विदुर नीति, शांति पर्व, रामायण के विचार को भी हमने इसमें समाहित करने का प्रयास किया था। किस तरह से राजनीतिक दलों ने संविधान को आगे बढ़ाया, इसकी भी चर्चा समयोचित होगी।
डॉक्टर भीमराव आंबेडकर ने कहा था कि कोई संविधान कितना भी अच्छा हो, वह बुरा हो सकता है जिन पर उसे चलाने की जिम्मेदारी है, अगर वो अच्छे न हों। कोई संविधान कितना भी बुरा क्यों न हो, वह अच्छा हो सकता है अगर चलाने वाले लोग अच्छे हों। परिवर्तन जीवन का मंत्र है, उसे संविधान सभा ने स्वीकार किया था और इसके लिए संविधान संशोधन का प्रावधान किया गया था।
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अभिव्यक्ति की आजादी कर्टेल की गई- शाह
संविधान बदलने का प्रावधान अनुच्छेद 368 के तहत संविधान में ही है। एक नेता आए हैं, 54 साल में खुद को युवा कहते हैं और वो चिल्लाते रहते हैं कि संविधान बदल देंगे। बीजेपी ने 16 साल में 16 परिवर्तन किए। कांग्रेस ने भी परिवर्तन किए और इनका टेस्ट कैसा था। परिवर्तन का उद्देश्य क्या था। क्या हमारे लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए परिवर्तन किए गए या अपनी राज्यसत्ता को टिकाने के लिए परिवर्तन किए गए।
इससे ही कांग्रेस के मंसूबों की पोल खुल जाती है। दोनों प्रमुख दलों के चार-चार संविधान संशोधन को लेना चाहूंगा। पहला संशोधन हुआ 18 जून 1951 को, ये संविधान सभा को ही संशोधन लेना पड़ा, 19 ए जोड़ा गया। अभिव्यक्ति की आजादी को कर्टेल करने के लिए पहला संशोधन आया और तब पीएम नेहरू थे।