एंटी पेपर लीक बिल पर संसद में बोले राघव चड्ढा, कहा-‘कैंसर का इलाज क्रोसिन से नहीं हो सकता’

Raghav Chadha spoke in Parliament: संसद में पब्लिक एग्जामिनेशंस (संशोधन) विधेयक-2026 पर चर्चा के दौरान सांसद राघव चड्ढा ने पेपर लीक की समस्या को देश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर संकट बताते हुए कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि मजबूत कानून और संस्थागत सुधारों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि नया कानून परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। अपने भाषण के दौरान उन्होंने छात्रों की मेहनत, परिवारों के संघर्ष, सरकार की ओर से उठाए गए कदमों और नए कानून के प्रमुख प्रावधानों पर विस्तार से अपनी बात रखी।

पेपर लीक केवल परीक्षा नहीं, सपनों को भी तोड़ता है’

राघव चड्ढा ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों छात्र वर्षों तक कठिन परिश्रम करते हैं। कई छात्र घर से दूर रहकर प्रतिदिन 18 घंटे तक पढ़ाई करते हैं, जबकि उनके माता-पिता अपनी जरूरतों में कटौती कर कोचिंग, किराया और पढ़ाई का खर्च उठाते हैं। कई परिवार कर्ज लेकर भी अपने बच्चों की शिक्षा जारी रखते हैं। ऐसे में यदि परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो जाए तो केवल एक परीक्षा प्रभावित नहीं होती, बल्कि छात्र की मेहनत, उसके परिवार की उम्मीदें और भविष्य भी टूट जाता है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक का असर केवल परिणामों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि छात्रों के आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।

‘कैंसर का इलाज क्रोसिन से नहीं हो सकता’

अपने संबोधन के दौरान राघव चड्ढा ने कहा कि पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या का समाधान केवल मीडिया में बयान देने से संभव नहीं है। उन्होंने कहा, “जिस तरह कैंसर का इलाज क्रोसिन से नहीं हो सकता, उसी तरह पेपर लीक जैसी बीमारी केवल साउंड बाइट या बयानबाजी से खत्म नहीं होगी। इसके लिए मजबूत कानून, प्रभावी संस्थागत व्यवस्था और ठोस कार्रवाई जरूरी है।” उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों की शुरुआत की है।

NEET छात्रों के दर्द का किया जिक्र

राघव चड्ढा ने अपने भाषण की शुरुआत NEET अभ्यर्थियों का उल्लेख करते हुए की। उन्होंने कहा कि छात्रों का गुस्सा और दर्द पूरी तरह जायज है, क्योंकि उन्होंने वर्षों तक मेहनत की है। उन्होंने कहा कि जब छात्रों ने अपनी चिंताएं सरकार और प्रधानमंत्री के सामने रखीं तो उन्हें गंभीरता से सुना गया। इसके बाद परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक रोकने के लिए कई अहम फैसले लिए गए। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल दोषियों को सजा देना नहीं, बल्कि छात्रों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा दोबारा कायम करना है।

सरकार के कदमों का किया उल्लेख

भाषण के दौरान राघव चड्ढा ने पेपर लीक के बाद सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि छात्रों का शैक्षणिक वर्ष प्रभावित न हो, इसलिए दोबारा परीक्षा कराई गई। मामले की जांच CBI को सौंपी गई और एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया, जिसने मुख्य सरगना सहित 13 लोगों को गिरफ्तार किया। उन्होंने कहा कि 75 दिनों के भीतर चार्जशीट फास्ट ट्रैक कोर्ट में दाखिल कर दी गई।

उन्होंने यह भी बताया कि NTA के 47 अधिकारियों को हटाया गया, तत्कालीन शिक्षा सचिव का तबादला किया गया और तत्कालीन शिक्षा मंत्री ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया। इसके अलावा छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का निर्णय भी लिया गया। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया, उन्हें मुआवजा देने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।

परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधारों की तैयारी

राघव चड्ढा ने कहा कि सरकार भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए तकनीक का व्यापक इस्तेमाल करेगी। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में NEET परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है, जिससे पेपर लीक की संभावना काफी हद तक समाप्त हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य के सुधारों के लिए नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक हाई पावर टास्क फोर्स गठित की गई है, जो परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने के सुझाव दे रही है।

नए कानून में क्या हैं प्रावधान

राघव चड्ढा ने कहा कि नया कानून केवल पेपर लीक करने वाले व्यक्तियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे संगठित नेटवर्क पर कार्रवाई करेगा। यदि किसी कोचिंग संस्थान, प्रिंटिंग प्रेस, लॉजिस्टिक एजेंसी, सॉल्वर गैंग, परीक्षा अधिकारी या किसी अंदरूनी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी समान कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि कानून में दोषियों के लिए 10 साल तक की सजा और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सभी अपराधों को संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-समझौतायोग्य बनाया गया है। साथ ही विशेष जांच व्यवस्था, दो महीने के भीतर जांच पूरी करने और फास्ट ट्रैक कोर्ट में समयबद्ध सुनवाई का भी प्रावधान किया गया है।

‘यह राजनीति नहीं, मेरिट की लड़ाई है’

अपने भाषण के अंत में राघव चड्ढा ने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने, सवाल पूछने और अपनी मांग रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन उनका आंदोलन राजनीतिक मंच नहीं बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी दल की नहीं, बल्कि “मेरिट बनाम माफिया और मेहनत बनाम सेटिंग” की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि विपक्ष में रहते हुए उनकी जिम्मेदारी सवाल पूछने की थी, लेकिन अब उनकी जिम्मेदारी समाधान देना है। उन्होंने कहा कि वह केवल सुर्खियां बटोरने के लिए बयान नहीं देना चाहते थे, बल्कि तब बोलना चाहते थे जब सरकार छात्रों के हित में ठोस समाधान और मजबूत कानून लेकर आए। उनके अनुसार, नया एंटी पेपर लीक कानून देश के युवाओं के भविष्य की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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