गोरखपुर: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को गोरखपुर दौरे पर सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण एवं परिचय समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों और सदस्यों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता आंदोलन में अधिवक्ताओं और गोरखपुर बार एसोसिएशन के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता केवल मुकदमे लड़ने तक सीमित नहीं होते, बल्कि समाज और न्याय व्यवस्था को दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आजादी की लड़ाई में अधिवक्ताओं का रहा अहम योगदान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की आजादी के आंदोलन में अधिवक्ताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। महात्मा गांधी, देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसे कई बड़े नेता अधिवक्ताओं के बीच से निकले। उन्होंने कहा कि जब भी वह प्रयागराज जाते हैं, उन्हें डॉ. राजेंद्र प्रसाद की स्मृतियां याद आती हैं। राष्ट्रपति रहने के दौरान भी डॉ. राजेंद्र प्रसाद माघ मेले के समय प्रयागराज में एक महीने तक प्रवास करते थे।
गोरखपुर बार की विरासत का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर सिविल बार की स्थापना वर्ष 1898 में गुलामी के दौर में हुई थी। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान गोरखपुर की कचहरी और यहां के अधिवक्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भी बार एसोसिएशन ने विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व देकर नई दिशा देने का काम किया। गोरखपुर बार ने न्यायमूर्ति, स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी सेनानी और अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व देश को दिए हैं, जो इसकी समृद्ध विरासत का प्रमाण है।
‘अधिवक्ता समाज के विधिक सलाहकार हैं’
मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिवक्ता केवल एक मुकदमा नहीं लड़ते, बल्कि सामान्य नागरिक के विकास के प्रतीक होते हैं। वे समाज के विधिक सलाहकार होने के साथ-साथ संविधान के सच्चे प्रहरी भी हैं। उन्होंने कहा कि विधि का शासन तभी स्थापित होता है, जब न्याय गुणवत्तापूर्ण, समयबद्ध और सभी के लिए सुलभ हो। न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने में अधिवक्ताओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने नवनिर्वाचित कार्यकारिणी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि लोकतंत्र के तीनों स्तंभ—विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका—जब अपनी-अपनी मर्यादा में रहकर कार्य करते हैं, तभी आम नागरिक को उसका लाभ मिलता है।