kedarnath yatra 2026: हरिद्वार: उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश और कई स्थानों पर भूस्खलन के कारण चार धाम यात्रा को दो दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया है। प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मंगलवार और बुधवार को यात्रा पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। अधिकारियों का कहना है कि मौसम सामान्य होने और यात्रा मार्ग पूरी तरह सुरक्षित होने के बाद ही श्रद्धालुओं को आगे जाने की अनुमति दी जाएगी। फिलहाल सभी संबंधित विभागों को अलर्ट पर रखा गया है।
भूस्खलन से बाधित हुए यात्रा मार्ग
गढ़वाल मंडल के आयुक्त ने बताया कि चारधाम यात्रा मार्ग पर कई स्थानों पर भूस्खलन होने से सड़कें बंद हो गई हैं। इसके अलावा भारतीय मौसम विभाग ने उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। ऐसे हालात में यात्रा जारी रखना श्रद्धालुओं के लिए जोखिम भरा हो सकता था। इसी वजह से प्रशासन ने एहतियात के तौर पर यात्रा को दो दिनों के लिए स्थगित करने का फैसला लिया है। सड़कों से मलबा हटाने और यातायात बहाल करने का काम लगातार जारी है। प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है।
अगले 15 घंटे बेहद अहम
मौसम विभाग के अनुसार गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ और आसपास के इलाकों में अगले 15 घंटों के दौरान बिजली चमकने के साथ भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। तेज हवाएं चलने और भूस्खलन की घटनाएं बढ़ने की भी आशंका जताई गई है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों और यात्रियों से सुरक्षित स्थानों पर रहने, नदी-नालों से दूर रहने और मौसम सामान्य होने तक अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा है कि हालात में सुधार होने के बाद यात्रा दोबारा शुरू करने की नई तारीख की जानकारी दी जाएगी।
हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं
चार धाम यात्रा की शुरुआत सामान्य तौर पर हरिद्वार या ऋषिकेश से होती है। श्रद्धालु यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के दर्शन करते हैं। यह यात्रा हर वर्ष मई से नवंबर तक संचालित होती है, जबकि सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण धामों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। सनातन धर्म में चार धाम यात्रा का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इन चारों धामों के दर्शन करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है और पापों से मुक्ति मिलती है। इसी वजह से हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचकर इस पवित्र यात्रा में शामिल होते हैं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से आधिकारिक मौसम और यात्रा संबंधी अपडेट के बाद ही आगे की यात्रा शुरू करने की सलाह दी है।