नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने राजधानी में अवैध निर्माणों के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत मंगलवार को पीतमपुरा और शालीमार बाग को जोड़ने वाली मुख्य सड़क के बीच बने एक अवैध धार्मिक ढांचे को हटा दिया। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, यह ढांचा सरकारी जमीन पर बना हुआ था और सड़क चौड़ीकरण परियोजना में बाधा बन रहा था। सरकार का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य क्षेत्र में ट्रैफिक जाम कम करना और लोगों के लिए आवागमन को सुगम बनाना है।
सरकारी जमीन पर अतिक्रमण पर जीरो-टॉलरेंस
दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण या अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि सड़क, सार्वजनिक सुविधाओं और विकास परियोजनाओं में बाधा बनने वाले अवैध ढांचों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।
अवैध निर्माणों पर लगातार कार्रवाई
सरकार के अनुसार, 1 जून से अब तक राजधानी में बिल्डिंग नियमों और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाली 94 अवैध इमारतों को ध्वस्त किया जा चुका है, जबकि 114 इमारतों को सील किया गया है।
3 जून को मालवीय नगर में हुए हादसे के बाद इस अभियान में और तेजी लाई गई। इसके बाद से अब तक 63 अवैध इमारतें गिराई जा चुकी हैं। 3 जून को एक दिन में सबसे अधिक 22 अवैध ढांचे ध्वस्त किए गए, जबकि 7 जून को 77 संपत्तियों को सील किया गया। राजस्व विभाग के अधिकारियों ने दिल्ली के 13 जिलों में 124 स्थानों का निरीक्षण कर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की है। इस अभियान में दिल्ली नगर निगम, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और अन्य संबंधित एजेंसियां संयुक्त रूप से कार्रवाई कर रही हैं।
सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार अवैध निर्माण, अतिक्रमण और फायर सेफ्टी नियमों के उल्लंघन के मामलों में सख्त रुख अपनाए हुए है। उन्होंने बताया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक मजबूत निगरानी व्यवस्था तैयार की जा रही है। सरकार इमारतों और सार्वजनिक परिसरों के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य करने के प्रस्ताव पर भी विचार कर रही है। इस व्यवस्था के तहत केवल उन्हीं इमारतों को बीमा का लाभ मिलेगा, जो निर्माण और सुरक्षा से जुड़े सभी सरकारी मानकों का पालन करेंगी।