रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का किया उद्घाटन, अब 35 से 45 मिनट में पूरा होगा सफर

लखनऊ: उत्तर प्रदेश को सोमवार को एक बड़ी बुनियादी सौगात मिली। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ-कानपुर नेशनल एक्सप्रेसवे (NE-6) का उद्घाटन किया। इस अवसर पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। 63 किलोमीटर लंबे इस छह लेन एक्सप्रेसवे के शुरू होने से लखनऊ और कानपुर के बीच करीब तीन घंटे का सफर घटकर सिर्फ 35 से 45 मिनट रह जाएगा। आम लोगों के लिए यह एक्सप्रेसवे मंगलवार सुबह 8 बजे से खोल दिया जाएगा।

3 घंटे का सफर अब 35-45 मिनट में

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय काफी घट जाएगा। जहां पहले ट्रैफिक के कारण यह सफर लगभग तीन घंटे में पूरा होता था, वहीं अब वाहन चालक केवल 35 से 45 मिनट में लखनऊ से कानपुर पहुंच सकेंगे। करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे की शुरुआत लखनऊ के शहीद पथ से होती है और यह कानपुर के चकेरी तक जाता है।

स्पीड लिमिट और वाहन नियम

एक्सप्रेसवे पर कारों के लिए अधिकतम 120 किमी प्रति घंटा और भारी वाहनों के लिए 80 किमी प्रति घंटा की स्पीड लिमिट तय की गई है। सुरक्षा कारणों से इस मार्ग पर दोपहिया और तीनपहिया वाहनों के प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। केवल चार पहिया और उससे बड़े वाहन ही इस एक्सप्रेसवे का उपयोग कर सकेंगे।

टोल और एंट्री-एग्जिट की व्यवस्था

इस एक्सप्रेसवे पर मंगलवार से ही टोल वसूली भी शुरू हो जाएगी। कारों के लिए एक तरफ का टोल 275 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि 24 घंटे के भीतर वापसी करने पर दोनों तरफ का कुल टोल 415 रुपये होगा। हल्के वाणिज्यिक वाहन, बस, ट्रक और अन्य भारी वाहनों के लिए अलग-अलग टोल दरें तय की गई हैं।

वाहन चालक दारोगाखेड़ा, बनी, हरौनी, अजगैन, अमरपास और कानपुर के आजाद चौक के पास स्थित छह इंटरचेंज से एक्सप्रेसवे पर प्रवेश और निकास कर सकेंगे।

बैरियर-फ्री MLFF टोल सिस्टम

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा एक्सप्रेसवे है, जहां मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम लागू किया गया है। इस तकनीक में वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी। एडवांस कैमरे वाहन के नंबर प्लेट और फास्टैग को स्कैन कर स्वतः टोल काट लेंगे।

यदि किसी वाहन पर फास्टैग नहीं होगा तो नंबर प्लेट के आधार पर उसकी पहचान की जाएगी। ऐसे मामलों में वाहन मालिक को दोगुना टोल देने के साथ 500 से 1,000 रुपये तक का जुर्माना भी भरना होगा। निर्धारित समय में भुगतान नहीं करने पर वाहन की आरसी निलंबित करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

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