नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सभी केंद्रीय मंत्रालयों के सचिवों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक करने जा रहे हैं। यह बैठक शाम करीब 4 बजे होगी। सेशेल्स दौरे से लौटने के बाद प्रधानमंत्री की यह पहली बड़ी प्रशासनिक बैठक है। बैठक में सरकार की प्राथमिकताओं, नीतिगत सुधारों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तेज करने पर विस्तार से चर्चा होगी।
बैठक के मुख्य मुद्दे
सूत्रों के अनुसार बैठक का एजेंडा काफी व्यापक है। सबसे पहले ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ यानी कारोबार को आसान बनाने के लिए उठाए गए कदमों की समीक्षा होगी। इसके साथ ही ‘ईज ऑफ लिविंग’ पर भी फोकस रहेगा ताकि आम नागरिकों को सरकारी सेवाएं तेजी और पारदर्शिता से मिल सकें।
आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई गति देने के लिए भी रोडमैप तैयार किया जाएगा। इसमें मैन्युफैक्चरिंग, स्टार्टअप, एमएसएमई और निर्यात को बढ़ावा देने वाले सेक्टरों पर विशेष चर्चा संभव है। इसके अलावा प्रशासनिक सुधार, डिजिटल गवर्नेंस और फाइलों के निपटान में तेजी लाने जैसे मुद्दे भी एजेंडे में शामिल हैं।
सचिव देंगे प्रेजेंटेशन और रोडमैप
बैठक में सभी मंत्रालयों के सचिव अपने-अपने विभागों की अब तक की प्रगति रिपोर्ट प्रधानमंत्री के सामने रखेंगे। साथ ही अगले 6 महीने से 1 साल का एक्शन प्लान और टारगेट भी पेश किए जाएंगे। अधिकारियों से कहा गया है कि वे अपनी योजनाओं में नवाचार और जनकेंद्रित सोच को प्राथमिकता दें।
सरकारी कामकाज को और प्रभावी बनाने, लालफीताशाही कम करने और निर्णय प्रक्रिया को तेज करने पर भी मंथन होगा। PM मोदी पहले भी कह चुके हैं कि फाइलें टेबल पर नहीं रुकनी चाहिए और समयबद्ध तरीके से काम होना चाहिए।
2 महीने में दूसरी बड़ी बैठक
यह पिछले 2 महीने में PM और शीर्ष नौकरशाही की दूसरी बड़ी संस्थागत बैठक है। इससे पहले 21 मई को केंद्रीय मंत्रिपरिषद और सचिवों की संयुक्त बैठक हुई थी। उस बैठक में ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए नीतिगत और संरचनात्मक बदलावों पर जोर दिया गया था।
उस समय PM मोदी ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि शासन को सरल, पारदर्शी और परिणाम आधारित बनाया जाए। उन्होंने कहा था कि विकसित भारत सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों का संकल्प है। जिन मंत्रालयों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर पाया गया था, उन्हें अपनी कार्यप्रणाली में सुधार कर बेहतर नतीजे देने के निर्देश भी दिए गए थे।
आज की बैठक में उन निर्देशों पर कितनी प्रगति हुई, इसकी भी समीक्षा होगी। कुल मिलाकर सरकार की कोशिश है कि नीतियों को जमीन पर तेजी से उतारा जाए और 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ा जाए।