रेवाड़ी: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को रेवाड़ी जिले के बावल में आयोजित ‘खेत बचाओ अभियान’ के समापन समारोह में शिरकत की। इस मौके पर उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए 121 करोड़ रुपए की 11 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं में 40 करोड़ रुपए की लागत से 2 परियोजनाओं का उद्घाटन और 81 करोड़ रुपए की 9 परियोजनाओं का शिलान्यास शामिल है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सैनी ने कहा कि केंद्र और हरियाणा सरकार किसानों की आय बढ़ाने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और डिजिटल कृषि के विस्तार के लिए लगातार काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इस दिशा में आईसीएआर और हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार ने जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य, फसल विविधीकरण और जलवायु स्मार्ट कृषि को अपनी कृषि नीति का मूल आधार बनाया है।
हरियाणा एफपीओ मिशन 2026 हुआ लॉन्च
समारोह में मुख्यमंत्री ने ‘हरियाणा एफपीओ मिशन 2026’ का भी शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि इस मिशन का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के छोटे किसान समूहों और किसान उत्पादक संगठनों को सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाना है। इससे न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि कृषि मूल्य श्रृंखला को भी मजबूती मिलेगी। एफपीओ के माध्यम से किसानों को बेहतर बाजार, तकनीक और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
किसानों के हित में 5 बड़ी घोषणाएं
मुख्यमंत्री ने किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने बताया कि धान की सीधी बिजाई करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 4500 रुपए प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसी तरह पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए पराली प्रबंधन करने वाले किसानों को 1200 रुपए प्रति एकड़ सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक नया पोर्टल शुरू किया गया है। इसके साथ ही कुरुक्षेत्र, जींद, सिरसा और करनाल में प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि कृषि विभाग के स्वामित्व वाली लगभग 800 एकड़ भूमि अगले 10 वर्षों के लिए केवल उन्हीं किसानों को पट्टे पर दी जाएगी जो उस भूमि पर प्राकृतिक और जैविक खेती करेंगे।
जैविक उत्पादों के विपणन को आसान बनाने के लिए पंचकूला, यमुनानगर, करनाल, सोनीपत, रोहतक, गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार, चरखी दादरी और नारनौल में प्राकृतिक व जैविक किसानों के लिए विशेष बिक्री स्थान उपलब्ध कराए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले साढ़े 11 वर्षों में सरकार ने किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और फसल खराबे के मुआवजे के रूप में 16,530 करोड़ रुपए दिए हैं।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा, “खेत तभी बचेंगे जब पानी बचेगा, पानी तभी बचेगा जब खेती बदलेगी और खेती तभी बदलेगी जब विज्ञान और किसान साथ चलेंगे।”