प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया यूएई यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में नई रणनीतिक साझेदारी का ढांचा तैयार किया गया। इस यात्रा में रक्षा सहयोग के अलावा पेट्रोलियम आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े अहम समझौते भी हुए। इनमें भारतीय स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (ISPRL) और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के बीच सहयोग शामिल है। साथ ही, 5 अरब डॉलर के संयुक्त अरब अमीरात के विकास निवेश की घोषणा भी की गई।6
नई दिल्ली। भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) अब अहम रक्षा साझेदार बनने जा रहे हैं। यूएई भारत से ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल और आकाश तीर ख़रीदने की इच्छा ज़ाहिर की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा , “यह संयुक्त अरब अमीरात के साथ बहुत महत्वपूर्ण साझेदारी है। हाल के कई वर्षों में भारत-UAE के संबंध में भारी उछाल आया है और इस उछाल में रक्षा साझेदारी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह साझेदारी मजबूत और गहरी हुई है।”
रणधीर जायसवाल ने अंतर-मंत्रालयीय ब्रिफिंग में बताया कि भारत-यूएई संबंध बहुआयामी हैं। व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा सहयोग इनके प्रमुख स्तंभ हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग में लगातार वृद्धि हुई है। भारत अब यूएई को ब्रह्मोस मिसाइल और आकाशतीर एयर डिफेंस सिस्टम जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियों की आपूर्ति पर चर्चा कर रहा है। यह कदम मध्य पूर्व में सुरक्षा चुनौतियों के बीच यूएई की विविध स्रोतों से हथियार खरीद की नीति के अनुरूप है।
भारत-UAE भरोसेमंद पार्टनर
भारत और यूएई के बीच व्यापक साझेदारी पहले से ही मजबूत है। दोनों देश आतंकवाद विरोधी सहयोग, संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा उद्योग सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा ने इन संबंधों को नई गति दी है।विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह साझेदारी न केवल द्विपक्षीय हितों को मजबूत करेगी बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा में भी योगदान देगी। रक्षा क्षेत्र में बढ़ते सहयोग से दोनों देशों की रक्षा क्षमताएं और मजबूत होंगी।
भारत यूएई को अपने प्रमुख रक्षा निर्यात गंतव्यों में शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी दोनों देशों के लिए ‘विन-विन’ साबित होगी।