नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के बाद भारत को बड़ी राहत मिली है। फरवरी से बंद पड़े स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से रास्ता खुलते ही कच्चे तेल, गैस और खाद लेकर आ रहे 11 भारतीय जहाज मंगलवार को गुजर गए। भारत से फारस की खाड़ी जाने वाले 2 जहाज भी रवाना हो चुके हैं।
फरवरी से फंसे थे जहाज
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि दोनों तरफ से जहाजों की आवाजाही से साफ है कि होर्मुज में नौवहन पर रोक हट गई है। 28 फरवरी को टकराव शुरू होने के बाद यह रास्ता लगभग बंद था। भारत के 10 फ्लैग-वाहक जहाज भी तभी से वहीं फंसे थे। 17 जून को अमेरिका-ईरान ने 14-सूत्रीय MoU पर हस्ताक्षर किए थे। अब फंसे जहाज भी जल्द निकल जाएंगे।
ईरान से तेल खरीद पर क्या बोली सरकार
जायसवाल ने कहा कि भारत की ऊर्जा नीति राष्ट्रीय हित पर टिकी है। “हम 1.4 अरब लोगों को किफायती दरों पर और अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा देना चाहते हैं।” मार्च में 30 दिन की छूट के बाद भारत ने अप्रैल में ईरान से सीमित तेल लिया था। सरकार ईरान-अमेरिका बातचीत पर नजर रख रही है।
2019 से पहले दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर था ईरान
अमेरिकी प्रतिबंधों से पहले ईरान भारत का अहम तेल सप्लायर था। 2009-10 में भारत ने ईरान से 22.1 मिलियन टन तेल खरीदा था, जो कुल आयात का 14% था। ईरान ने कई बार कहा है कि वह सप्लाई फिर शुरू करने को तैयार है। 1998 में परमाणु परीक्षण के बाद लगे प्रतिबंधों में भी ईरान ने तेल देना बंद नहीं किया था।
रूस से आ रहा 50% तेल
भारत अपनी जरूरत का 90% तेल आयात करता है। FY 2026 में 123 अरब डॉलर का तेल खरीदा। फिलहाल रूस की हिस्सेदारी 50% है। सऊदी अरब, इराक और UAE की हिस्सेदारी घटी है। अमेरिका भी अब बड़ा सप्लायर बन गया है। भारत ने जोखिम कम करने के लिए सप्लाई के स्रोत बढ़ाए हैं।
होर्मुज खुलने से क्रूड की कीमतों में राहत की उम्मीद है। लेकिन पश्चिम एशिया में हालात अब भी नाजुक हैं।