चंडीगढ़: केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में बुधवार को विद्युत मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की बैठक हुई। करीब तीन घंटे चली इस बैठक में राज्य मंत्री और 17 राज्यों से समिति के सदस्य सांसद मौजूद रहे। 2024 में सरकार बनने के बाद समिति की यह नौवीं बैठक थी।
ग्रिड स्थिरता सबसे अहम मुद्दा
बैठक के बाद मंत्री मनोहर लाल ने बताया कि आज का मुख्य विषय ग्रिड स्थिरता था। अलग-अलग प्रकार के बिजली उत्पादन और मांग में तालमेल बैठाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर ग्रिड को खतरा हुआ तो पूरा पावर सेक्टर ठप हो सकता है। दुनिया में ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। भारत और हाल में गुजरात में भी आपूर्ति-मांग में असंतुलन की घटना सामने आई थी।
बिजली की मांग और उत्पादन लक्ष्य
मनोहर लाल ने कहा कि 2024 में देश की पीक मांग 250 गीगावॉट रही, जिसमें 0.01% की कमी थी। 2025 में मांग घटी, लेकिन 2026 में फिर बढ़ी है। चालू वित्त वर्ष में 271 गीगावॉट का लक्ष्य था। 21 मई को मांग 270.8 गीगावॉट तक पहुंची, जबकि उत्पादन क्षमता 283 गीगावॉट रही। अनुमान है कि 2027 तक मांग 330 गीगावॉट तक जा सकती है। विभाग इसके लिए पूरी तैयारी कर रहा है।
सोलर, न्यूक्लियर और हाइड्रो पर जोर
मंत्री ने कहा कि सोलर बिजली सिर्फ दिन में मिलती है, विंड पावर हवा पर निर्भर है। सबसे भरोसेमंद न्यूक्लियर बिजली है जो लगातार मिलती है। हाइड्रो पावर भी पानी की उपलब्धता पर निर्भर करती है। गुजरात और राजस्थान में 40 गीगावॉट सोलर उत्पादन हो रहा है। ट्रांसमिशन की कमी दूर कर सोलर नेटवर्क बढ़ाया जाएगा। पहाड़ी राज्यों में हाइड्रो क्षमता भी बढ़ाई जा रही है।
ईवी और स्मार्ट मीटर को बढ़ावा
पेट्रोलियम की कमी को बिजली से पूरा करने का लक्ष्य है। इलेक्ट्रिक वाहन और इंडक्शन का इस्तेमाल बढ़ाकर पेट्रोल की मांग घटाई जाएगी। सभी राज्यों को स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य दिया गया है। पहले सरकारी दफ्तरों में प्रीपेड मीटर लगेंगे। घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल छूट दी गई है। स्मार्ट मीटर से बिजली चोरी रुकेगी और बिल की समस्या भी खत्म होगी।
मंत्री ने कहा कि भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से भी बिजली की मांग बढ़ेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर देश में बिजली की कमी नहीं होने दी जाएगी।