नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक करीब ढाई घंटे चली और इसका मुख्य एजेंडा पश्चिम एशिया में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण उत्पन्न परिस्थितियों का आकलन और उससे निपटने की तैयारियों का जायजा लेना था। यह पीएम मोदी द्वारा बुलाई गई इस संघर्ष पर दूसरी CCS बैठक थी।
बैठक में चर्चा के प्रमुख बिंदु
कृषि, उर्वरक, MSME, शिपिंग, विमानन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों में उभरती चुनौतियों से निपटने के उपायों पर विचार।
LPG और LNG की आपूर्ति में विविधता लाने, ईंधन शुल्क में कटौती और बिजली क्षेत्र से जुड़े उपायों की समीक्षा।
आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को स्थिर रखने के लिए निगरानी, जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने की कार्रवाई।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय बनाए रखने के लिए नियंत्रण कक्ष (Control Rooms) की स्थापना।
उर्वरक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए यूरिया उत्पादन बनाए रखना और DAP/NPKS की आपूर्ति के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के साथ समन्वय।
आम नागरिकों के लिए आवश्यक वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना।
संघर्ष के दुष्प्रभावों से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपाय।
अफवाहों और गलत सूचनाओं से बचाव के लिए समय पर प्रामाणिक जानकारी जनता तक पहुंचाना।
बैठक में उपस्थित वरिष्ठ नेता
बैठक में केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, अमित शाह, एस. जयशंकर, निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल, शिवराज सिंह चौहान, जे.पी. नड्डा, अश्विनी वैष्णव, मनोहर लाल खट्टर, प्रह्लाद जोशी, किंजरापु राममोहन नायडू और हरदीप सिंह पुरी उपस्थित थे।
साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा, शक्तिकांत दास और कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन भी बैठक में मौजूद थे।
पीएम मोदी के दिशा-निर्देश
प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक के बाद कहा कि विभिन्न मंत्रालय और विभाग युद्ध के दुष्प्रभावों से निपटने के लिए सक्रिय हैं। उन्होंने नागरिकों से अफवाहों से बचने और केवल प्रामाणिक जानकारी पर भरोसा करने का आग्रह किया।
पिछली बैठक और सरकार के प्रयास
22 मार्च को पीएम मोदी ने इसी समूह के साथ पहली CCS बैठक कर पश्चिम एशिया संघर्ष की बदलती स्थिति का जायजा लिया था। इसमें नागरिकों के लिए आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता, भोजन, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा की समीक्षा शामिल थी।
12 मार्च को उन्होंने इस युद्ध को वैश्विक ऊर्जा संकट बताया और इसे “राष्ट्रीय चरित्र की परीक्षा” कहा। उन्होंने सरकार को अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं में रुकावटों से निपटने और जनता की असुविधा कम करने के लिए सतत प्रयास करने का निर्देश दिया।