गुवाहाटी: नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को असम के डिब्रूगढ़ में एक चाय बागान का दौरा किया और वहां काम करने वाली महिला श्रमिकों के साथ चाय की पत्तियां तोड़ीं। उन्होंने चाय को “असम की आत्मा” बताते हुए इस दौरे को एक “यादगार अनुभव” करार दिया। प्रधानमंत्री ने महिला श्रमिकों से उनकी मेहनत और पारंपरिक कला के बारे में बातचीत की और उनसे चाय की पत्तियां तोड़ने का तरीका भी सीखा। उन्होंने एक महिला श्रमिक को अपना “गुरु” भी बताया। श्रमिक महिलाओं ने पारंपरिक लाल बॉर्डर वाली सफेद साड़ियां पहनी हुई थीं।
शिक्षा और संस्कृति पर बातचीत
पीएम मोदी ने श्रमिकों से उनके बच्चों की पढ़ाई और खेलकूद में भागीदारी के बारे में सवाल किए। महिलाओं ने बताया कि उनके बच्चे फुटबॉल खेलते हैं और शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने महिला श्रमिकों को बताया कि वह पहले एक “चायवाला” थे और चाय बेचा करते थे। उन्होंने कहा कि असम में बनी चाय उनके गांव गुजरात तक पहुंचती है, जो श्रमिकों की मेहनत का परिणाम है।
चाय बागान में अनुभव और स्थानीय संस्कृति
प्रधानमंत्री ने चाय बागान में लगभग आधे घंटे बिताए और श्रमिकों की चिंताओं पर चर्चा की, जिसमें मजदूरी, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा शामिल थे। महिलाओं ने पारंपरिक झुमुर नृत्य प्रस्तुत किया और बिहू पर्व के पकवानों जैसे ‘तिल और घिला पिठा’ व ‘हांडो गुरी’ के बारे में बताया। मोदी ने उनकी मेहनत और योगदान की सराहना की।