नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बृहस्पतिवार रात टेलीफोन पर अपने ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची से बातचीत की। पश्चिम एशिया में जारी संकट के बाद दोनों नेताओं के बीच यह चौथी बातचीत है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर चिंता
यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब भारत होर्मुज जलडमरूमध्य के दोनों ओर खड़े 28 भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के प्रयास तेज कर रहा है। अमेरिका और इज़राइल के साथ तनाव बढ़ने के बाद ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को आंशिक रूप से अवरुद्ध कर दिया है।
पहले भी हो चुकी है बातचीत
अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले के तुरंत बाद जयशंकर और अराघची के बीच 28 फरवरी को पहली बार बातचीत हुई थी। इसके बाद दोनों नेताओं ने 5 मार्च और 10 मार्च को भी फोन पर चर्चा की थी। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर बताया कि बातचीत के दौरान द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ ब्रिक्स से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
ईरान ने दी ताजा हालात की जानकारी
ईरान की ओर से जारी बयान के अनुसार, अराघची ने अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए “हमलों और अपराधों” के बाद उत्पन्न स्थिति और इसके क्षेत्रीय तथा वैश्विक सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी दी।
आत्मरक्षा के अधिकार पर जोर
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि तेहरान आत्मरक्षा के अपने वैध अधिकार का उपयोग करने के लिए दृढ़ है। उन्होंने ईरान के खिलाफ सैन्य आक्रामकता की निंदा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मंचों की भूमिका पर भी जोर दिया।
अराघची ने बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने में ब्रिक्स की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि मौजूदा समय में इस संगठन को क्षेत्र और दुनिया में स्थिरता व सुरक्षा को मजबूत करने के लिए रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए। बयान में कहा गया कि अराघची ने क्षेत्र में स्थिरता और दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के तरीकों की तलाश को “सामूहिक आवश्यकता” बताया।