US News: ट्रंप के टैरिफ फैसले को अमेरिकी कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड (U.S. Court of International Trade) ने एक बड़ा फैसला सुनाया, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए आपातकालीन टैरिफ को रद्द करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करते हुए सभी प्रभावित इंपोर्टर्स को रिफंड का आदेश दिया गया। जज रिचर्ड ईटन ने स्पष्ट किया कि “सभी इंपोर्टर्स ऑफ रिकॉर्ड” (importers of record) सुप्रीम कोर्ट के 20 फरवरी 2026 के फैसले से लाभान्वित होने के हकदार हैं। यह फैसला ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि यह टैरिफ रिफंड प्रक्रिया को तेज करता है।
क्या था ट्रम्प का आदेश?
Trump ने 2025 में इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA, 1977) के तहत बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाए थे, जिसमें ग्लोबल रेसिप्रोकल टैरिफ (ट्रेड डेफिसिट पर) और ड्रग ट्रैफिकिंग से जुड़े टैरिफ शामिल थे। इनमें कनाडा, मैक्सिको पर 25%, चीन पर 10% और सभी देशों पर 10% बेसलाइन टैरिफ थे। सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला दिया कि IEEPA राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की शक्ति नहीं देता, क्योंकि टैरिफ लगाना कांग्रेस का विशेषाधिकार (टैक्सिंग पावर) है। कोर्ट ने टैरिफ को अवैध घोषित किया, लेकिन रिफंड प्रक्रिया पर स्पष्ट निर्देश नहीं दिए।
ट्रम्प प्रशासन ने कैसे वसूला टैरिफ
अब, पेन व्हार्टन बजट मॉडल के अनुसार, सरकार ने दिसंबर 2025 तक $130 बिलियन से ज्यादा टैरिफ वसूले थे, और कुल रिफंड $175 बिलियन तक पहुंच सकता है। यह ट्रांसपोर्टेशन और जस्टिस डिपार्टमेंट के सालाना खर्च से ज्यादा है। जज ईटन ने कहा कि यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) को अब IEEPA ड्यूटी को अनदेखा करके ड्यूटी रीकैलकुलेट करनी होगी। यह फैसला एक केस (Atmus Filtration) पर था, लेकिन सभी इंपोर्टर्स पर लागू होगा।
ट्रंप प्रशासन ने रिफंड प्रक्रिया को धीमा करने की कोशिश की थी। 2 मार्च को फेडरल अपील्स कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। अब रिफंड प्रक्रिया शुरू हो गई है, लेकिन चुनौतियां बाकी हैं। CBP का सिस्टम मास रिफंड के लिए तैयार नहीं, अपील की संभावना, और ब्याज (हर महीने $700 मिलियन तक) का बोझ। ट्रेड एक्सपर्ट्स का कहना है कि छोटे-बड़े इंपोर्टर्स (FedEx जैसी कंपनियां सहित) अब क्लेम फाइल कर सकते हैं।
यह फैसला ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी को कमजोर करता है, क्योंकि IEEPA टैरिफ अब अवैध हैं। ट्रंप ने कहा कि वे नए तरीके से टैरिफ लगाएंगे, लेकिन यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था, इंपोर्टर्स और ग्लोबल ट्रेड पर बड़ा असर डालेगा।