Iran Israel war: (दुबई): पश्चिम एशिया में जारी ईरान-इजराइल युद्ध के छठे दिन बृहस्पतिवार तड़के ईरान ने इजराइल को निशाना बनाकर कई मिसाइलें दागीं। इससे पहले एक अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरानी युद्धपोत को डुबोने की घटना सामने आई थी, जिसके बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। ईरान ने पूरे क्षेत्र में सैन्य और आर्थिक बुनियादी ढांचे को नष्ट करने की चेतावनी भी दी है।
इजराइल द्वारा हमले की घोषणा किए जाने से कुछ ही समय पहले उसकी सेना ने कहा कि उसने लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्ला चरमपंथी समूह के ठिकानों पर नए हमले शुरू किए हैं।
ईरान पर तेज हुई बमबारी
अमेरिका और इजराइल ने बुधवार को ईरान के सुरक्षा बलों और प्रशासनिक संस्थानों को निशाना बनाते हुए हमले तेज कर दिए थे। हमलों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि ईरानी सरकारी टेलीविजन को संघर्ष की शुरुआत में मारे गए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के लिए आयोजित शोक समारोह को स्थगित करने की घोषणा करनी पड़ी। उल्लेखनीय है कि खामेनेई के पूर्ववर्ती अयातुल्ला रुहोल्ला खोमैनी के अंतिम संस्कार में 1989 में लाखों लोग शामिल हुए थे।
सरकार गिराने के संकेत
अमेरिका और इजराइल ने शनिवार को ईरान के शीर्ष नेतृत्व, मिसाइल भंडार और परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाते हुए इस युद्ध की शुरुआत की थी। दोनों देशों की कार्रवाई से यह संकेत मिला है कि उनका लक्ष्य ईरान की मौजूदा सरकार को कमजोर करना या गिराना हो सकता है। हालांकि बदलते लक्ष्यों और रणनीतियों के कारण इस युद्ध के लंबा खिंचने की आशंका जताई जा रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को युद्ध के मोर्चे पर “शानदार प्रदर्शन” के लिए अमेरिकी सेना की सराहना की। वहीं अमेरिकी सीनेट में उनके सहयोगी रिपब्लिकन सांसदों ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन किया और युद्ध रोकने की मांग वाले प्रस्ताव को खारिज कर दिया।
अन्य देशों पर भी हमले
संघर्ष बढ़ने के साथ ईरान ने बहरीन, कुवैत और इजराइल को निशाना बनाकर हमले किए। तुर्किये ने कहा कि नाटो की रक्षा प्रणाली ने ईरान से दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को तुर्किये के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही रोक दिया।अधिकारियों के अनुसार अब तक इस युद्ध में ईरान में 1,000 से अधिक, लेबनान में 70 से अधिक और इजराइल में लगभग 12 लोगों की मौत हो चुकी है।
तेल आपूर्ति और हवाई यातायात प्रभावित
युद्ध के कारण वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर असर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री नौवहन बाधित हुआ है और पश्चिम एशिया में लाखों यात्री विभिन्न हवाई अड्डों पर फंसे हुए हैं। बढ़ते संघर्ष ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजारों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।