New Delhi: भारत ने रूस से 288 अतिरिक्त S-400 मिसाइलें खरीदने को हरी झंडी दे दी है, जो देश की वायु रक्षा को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है। रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की अध्यक्षता कर रहे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को इस प्रस्ताव को ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (Acceptance of Necessity – AoN) प्रदान की। इस डील की अनुमानित लागत ₹10,000 करोड़ है और इसे फास्ट ट्रैक प्रोसीजर (FTP) के तहत तेजी से पूरा किया जाएगा।
120 शॉर्ट रेंज और 168 लाँज रेंज का ऑर्डर
दिए गए ऑर्डर में 120 शॉर्ट-रेंज (40 किमी तक) और 168 लॉन्ग-रेंज (400 किमी तक) मिसाइलें शामिल हैं। ये मिसाइलें S-400 ट्रायम्फ सिस्टम के लिए हैं, जो पहले से ही भारतीय वायु सेना में तैनात हैं। भारत ने 2018 में 5 स्क्वाड्रन (रेजिमेंट) S-400 की खरीद का अनुबंध किया था, जिसमें से 3 स्क्वाड्रन मिल चुके हैं। बाकी दो स्क्वाड्रन जून और नवंबर 2026 तक मिलने वाले हैं। ये अतिरिक्त मिसाइलें स्टॉक को रीप्लेनिश करेंगी, खासकर मई 2025 के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारी उपयोग के बाद, जहां S-400 ने पाकिस्तानी खतरों को सफलतापूर्वक रोका था।
114 अतिरिक राफेल विमान आएंगे
भारत बड़े डिफेंस अपग्रेड प्लान पर फोकस कर रहा है। DAC ने कुल ₹3.60 लाख करोड़ के मेगा पैकेज को मंजूरी दी है।इसमें भारतीय वायु सेना के लिए 114 अतिरिक्त राफेल मल्टी-रोल फाइटर जेट शामिल हैं, जिनकी कीमत ₹3.25 लाख करोड़ के करीब है। यह पहले खरीदे गए 36 राफेल के बाद दूसरी खेप होगी। ये जेट बहु-उद्देश्यीय हैं, एयर सुपीरियरिटी, ग्राउंड अटैक और न्यूक्लियर डिलीवरी में सक्षम हैं।
हर स्तर से मजबूत होगी सेना
भारतीय नौसेना के लिए अतिरिक्त P-8I लॉन्ग-रेंज मैरीटाइम रिकॉन्सेंस एयरक्राफ्ट (Boeing Poseidon), जो एंटी-सबमरीन वारफेयर, मैरीटाइम सर्विलांस और ISR (इंटेलिजेंस, सर्विलांस, रिकॉन्सेंस) में मजबूती देगा। यह पैकेज आर्मी, नेवी और कोस्ट गार्ड की जरूरतों को भी कवर करता है, जिसमें कॉम्बैट मिसाइलें, एंटी-टैंक मिसाइलें और इंडिजिनस मरीन गैस टरबाइन शामिल हैं। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ की दिशा में महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई प्लेटफॉर्म्स में भारतीय निर्माण पर जोर है।
चीन और पाकिस्तान को चुनौती
ये फैसले क्षेत्रीय चुनौतियों खासकर चीन और पाकिस्तान सेके मद्देनजर लिए गए हैं। S-400 की लेयरड एयर डिफेंस, राफेल की मल्टी-रोल क्षमता और P-8I की समुद्री निगरानी से भारत की सैन्य तैयारियां अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचेंगी। यह रूस और फ्रांस के साथ मजबूत रणनीतिक साझेदारी को भी दर्शाता है। कुल मिलाकर, यह मेगा प्लान भारत को एक मजबूत, आधुनिक और स्वावलंबी रक्षा शक्ति बनाने की ओर ले जा रहा है