हरिद्वार: वरिष्ठ भाजपा नेता मनोहर लाल ने कहा है कि वर्ष 1979 में प्रयागराज में आयोजित विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के द्वितीय विश्व हिंदू सम्मेलन में पूज्यपाद गुरुदेव स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज के सान्निध्य ने उनके जीवन की दिशा तय की। उन्होंने बताया कि उस समय मिली आध्यात्मिक और वैचारिक प्रेरणा के प्रभाव से उन्होंने वर्ष 1980 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रचारक बनने का निर्णय लिया।
गुरुदेव के विचारों का प्रभाव
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज का जीवन आध्यात्मिक साधना, राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना का उत्कृष्ट उदाहरण था। उनके विचारों और मार्गदर्शन ने न केवल उन्हें, बल्कि कई अन्य युवाओं को भी राष्ट्रसेवा और सामाजिक दायित्व के प्रति प्रेरित किया।
आरएसएस प्रचारक बनने का मार्ग
उन्होंने बताया कि संघ से जुड़ने के अनुभव ने उन्हें अनुशासन, सेवा और संगठनात्मक जीवन के मूल्यों से परिचित कराया। यह निर्णय उनके सार्वजनिक जीवन की आधारशिला बन गया, जिससे उन्हें आगे चलकर समाज और राष्ट्र के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिला।
संतों का योगदान
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि संतों का योगदान केवल आध्यात्मिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज जैसे संतों ने सामाजिक और राष्ट्रीय चेतना को भी मजबूती दी। उनके विचार आज भी युवाओं को देश और समाज की सेवा के लिए प्रेरित करते हैं।
आध्यात्मिक प्रेरणा और जीवन दृष्टि
उन्होंने कहा कि उस सम्मेलन का अनुभव उनके जीवन में निर्णायक मोड़ साबित हुआ। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि गुरुदेव का मार्गदर्शन केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि जीवन की दिशा, सेवा और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भी मार्ग दिखाने वाला था।