नई दिल्ली: केंद्रीय ऊर्जा एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने आज केंद्रीय विद्युत अनुसंधान संस्थान (CPRI) की महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में संस्थान की टेस्टिंग सुविधाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर विस्तृत समीक्षा हुई। मंत्री ने अपने ट्वीट में बताया कि ऊर्जा क्षेत्र की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए CPRI की परीक्षण सुविधाओं का व्यापक विस्तार किया जा रहा है।
‘मेक इन इंडिया’ अभियान को बल
यह विस्तार उन्नत विद्युत उपकरणों की टेस्टिंग को देश में ही सुनिश्चित करेगा, जिससे विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी। इससे ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को बल मिलेगा और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को नई गति प्राप्त होगी। CPRI विद्युत मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्थान है। बेंगलूरु में इसके मुख्यालय सहित देशभर में कई इकाइयों (भोपाल, हैदराबाद, नागपुर, नोएडा, कोलकाता, गुवाहाटी आदि) के साथ विद्युत उपकरणों के अनुसंधान, परीक्षण और प्रमाणीकरण में अग्रणी भूमिका निभाता है।
हाई वोल्टेज उपकरणों का अपग्रेडेशन
बैठक में शॉर्ट सर्किट टेस्टिंग, हाई वोल्टेज उपकरणों की जांच, ट्रांसफार्मर और स्विचगियर जैसी सुविधाओं के अपग्रेडेशन पर जोर दिया गया। सरकार की योजना 2021-2026 तक के आरएंडडी बजट के तहत इन सुविधाओं को विश्वस्तरीय बनाने की है, जिसमें ईएचवी/यूएचवी उपकरणों (800/1200 केवी) की टेस्टिंग शामिल है। इससे न केवल बिजली क्षेत्र की विश्वसनीयता बढ़ेगी, बल्कि घरेलू निर्माताओं को बढ़ावा मिलेगा।
बिजली में आत्मनिर्भर होगा देश
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत को वैश्विक स्तर पर विद्युत प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। पिछले वर्षों में CPRI ने नासिक में नई क्षेत्रीय टेस्टिंग लैब का उद्घाटन किया था, जो इस दिशा में निरंतर प्रयासों का प्रतीक है। मंत्री खट्टर ने जोर दिया कि मजबूत टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से सस्टेनेबल और सुरक्षित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी, जो विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करेगा।