नई दिल्ली दिल्ली सरकार ने गंभीर वायु प्रदूषण को देखते हुए राष्ट्रीय राजधानी में निजी कार्यालयों को निर्देश दिया है कि कार्यस्थलों पर कर्मचारियों की उपस्थिति अधिकतम 50 प्रतिशत तक सीमित रखी जाए, जबकि शेष कर्मचारियों को घर से काम करना होगा। यह आदेश चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्ययोजना (ग्रैप) के चौथे चरण के तहत लागू प्रतिबंधों को ध्यान में रखते हुए जारी किया गया है।
ग्रैप-4 के तहत जारी परामर्श
श्रम विभाग द्वारा जारी परामर्श के अनुसार, यह निर्देश वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) द्वारा नवंबर में हुई सुनवाई और परामर्श के बाद ग्रैप में किए गए संशोधनों के अनुरूप है। सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य प्रदूषण के प्रमुख कारणों में शामिल वाहनों की आवाजाही को कम करना है। परामर्श में कहा गया है कि कार्यालयों में उपस्थिति सीमित करने से सड़कों पर निजी वाहनों की संख्या घटेगी, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिलेगी, खासकर उस समय जब प्रदूषण का स्तर ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंच गया हो।
निजी संस्थानों के लिए निर्देश
आदेश के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर के सभी निजी कार्यालयों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी समय आधे से अधिक कर्मचारी कार्यालय में उपस्थित न हों। साथ ही, जहां संभव हो, अलग-अलग कार्य समय लागू करने, घर से काम करने के नियमों का सख्ती से पालन कराने और कार्यालय आने-जाने से जुड़े वाहनों की आवाजाही न्यूनतम रखने के निर्देश दिए गए हैं।
उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई
सरकार ने चेतावनी दी है कि निर्देशों का पालन न करने पर पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 15 और 16 तथा अन्य लागू कानूनों के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
आवश्यक सेवाओं को छूट
हालांकि, अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक व निजी स्वास्थ्य संस्थानों, अग्निशमन सेवाओं, कारागारों, सार्वजनिक परिवहन, बिजली, पानी, स्वच्छता एवं संबंधित निगम सेवाओं, आपदा प्रबंधन तथा वायु प्रदूषण नियंत्रण, निगरानी और प्रवर्तन से जुड़े विभागों को इन प्रतिबंधों से छूट दी गई है।