government is ready discuss SIR in Parliament: मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर तत्काल चर्चा की विपक्ष की मांग के बीच, संसदीय मामलों के मंत्री किरन रीजीजू ने मंगलवार को कहा कि सरकार किसी भी मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष को इसके लिए समय सीमा तय नहीं करनी चाहिए।
विपक्ष की मांग और रीजीजू की प्रतिक्रिया
विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे की SIR के मुद्दे पर सदन में तत्काल चर्चा शुरू करने की मांग के बाद, रीजीजू ने कहा कि वह मंगलवार को विभिन्न दलों के नेताओं से बातचीत करेंगे और कोई हल निकालेंगे। सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा तथा रीजीजू ने आश्वस्त किया कि सरकार चर्चा के लिए उपयुक्त समय तय करने को लेकर विपक्ष से विचार-विमर्श करेगी। नड्डा ने कहा कि उन्होंने कहा था कि इस मुद्दे पर फैसला करने के लिए जल्द ही विपक्षी नेताओं की एक बैठक बुलाई जाएगी।
SIR के मुद्दे पर तत्काल चर्चा की खरगे की मांग पर रीजीजू ने कहा कि विपक्ष समय का दबाव न डाले। उन्होंने कहा मैंने कल भी कहा था कि कृपया समय को लेकर शर्त न रखें। उन्होंने आगे कहा मैं सभी दलों से औपचारिक और अनौपचारिक बातचीत करूंगा। परामर्श की प्रक्रिया शुरू होगी तो बात आगे बढ़ेगी। समस्या तब शुरू होती है जब आप समय को लेकर सवाल उठाते हैं। हर चीज़ मशीन की तरह नहीं चल सकती। संसदीय लोकतंत्र में हमें बातचीत करनी होगी, हमें चर्चा करनी होगी।”
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष चुनाव नहीं जीत पाने की निराशा सदन में उतार रहा है। रीजीजू ने कहा देश में कई मुद्दे हैं। आपको ऐसा नहीं करना चाहिए कि एक मुद्दे को कमतर करें और दूसरा उठाएं। सभी मुद्दे महत्वपूर्ण हैं। आप चुनाव नहीं जीत सकते। लोग आपके ऊपर भरोसा नहीं करते। और आप अपना गुस्सा सदन में निकालते हैं। यह सही नहीं है। मैंने कल भी कहा था कि हम चर्चा के लिए तैयार हैं लेकिन हमें पहले औपचारिक रूप से बैठक करनी होगी। समय पर जोर देना ठीक नहीं है।”
विपक्ष का तर्क BLO की जानें खतरे में
विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने दावा किया कि SIR के काम के दबाव के कारण 28 ब्लॉक स्तर अधिकारी (BLOs) की मृत्यु हो चुकी है। उन्होंने कहा यह तात्कालिक मुद्दा है। लोकतंत्र, नागरिकों और देश के हित में चर्चा अभी होनी चाहिए। हम सहयोग करेंगे। हम चाहते हैं कि इस मुद्दे पर अभी चर्चा हो। हमारा अनुरोध है कि SIR पर तत्काल चर्चा हो। यह गंभीर मुद्दा है क्योंकि देश में BLO की जान दांव पर लगी है।
सदन में हंगामा और प्रक्रिया
उच्च सदन की बैठक शुरू होने पर सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए। यह प्रक्रिया पूरी होते ही विपक्षी सदस्यों ने SIR के मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग उठाई और नारे लगाते हुए आसन के समीप आ गए सभापति ने इसे अनुशासनहीनता बताते हुए उन्हें अपने स्थानों पर लौटने को कहा। उन्होंने बताया कि उन्हें नियत कामकाज स्थगित कर नियम 267 के तहत पांच विषयों पर चर्चा करने के लिए 20 नोटिस मिले, लेकिन ये नोटिस प्रक्रियागत आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं थे, इसलिए उन्होंने इन्हें स्वीकार नहीं किया।
विपक्षी सदस्यों ने इसे सदन की परंपरा के खिलाफ बताया। हंगामे के बीच सभापति ने शून्यकाल चलाने का प्रयास किया। लेकिन शून्यकाल के तहत मुद्दे उठाने के लिए जिन विपक्षी सदस्यों के नाम पुकारे गए, उनमें से ज्यादातर ने SIR के मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग उठाई। सभापति ने इन सदस्यों को अनुमति नहीं दी और दूसरे सदस्यों के नाम पुकारे।