संस्थागत क्षेत्रों में कुत्ते काटने के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, आवारा कुत्तों को आश्रय स्थलों में ले जाने का निर्देश

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नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों जैसे संस्थागत क्षेत्रों में कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की और आदेश दिया कि ऐसे आवारा कुत्तों को तुरंत निर्दिष्ट आश्रय स्थलों में भेजा जाए।

एक्सप्रेस-वे से मवेशियों को भी हटाने का निर्देश

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की विशेष पीठ ने इस मामले में कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। पीठ ने कहा कि प्राधिकारियों की यह जिम्मेदारी है कि वे राजमार्गों और एक्सप्रेसवे से मवेशियों और अन्य आवारा पशुओं को हटाकर सुरक्षित आश्रय स्थलों में स्थानांतरित करें।

शैक्षणिक संस्थान परिसरों में न जाने पाएं आवारा कुत्ते

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी और निजी शैक्षणिक संस्थानों तथा अस्पताल परिसरों में आवारा कुत्तों का प्रवेश रोका जाए ताकि कुत्तों द्वारा काटे जाने की घटनाओं को रोका जा सके। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया कि ऐसे संस्थानों से हटाए गए कुत्तों को वापस उसी स्थान पर नहीं छोड़ा जाए।

अगली सुनवाई 13 जनवरी को

पीठ ने प्राधिकारियों को निर्देश दिया कि वे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) सहित संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर एक संयुक्त अभियान चलाएं और उन क्षेत्रों की पहचान करें जहां आवारा जानवरों की उपस्थिति अधिक है। मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी को निर्धारित की गई है। इससे पहले, न्यायालय ने 3 नवंबर को कहा था कि वह उन क्षेत्रों के लिए अंतरिम दिशानिर्देश जारी करेगा जहां कर्मचारी आवारा कुत्तों को खाना खिलाते और आश्रय देते हैं, जिससे समस्या और गंभीर हो रही है।

आवारा कुत्तों से बढ़ रहे रेबीज के मामले

सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला 28 जुलाई को स्वतः संज्ञान में लिया था, जब एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया था कि राष्ट्रीय राजधानी में आवारा कुत्तों के काटने से बच्चों में रेबीज संक्रमण के मामलों में वृद्धि हो रही है। अदालत ने कहा कि यह मुद्दा न केवल सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा है बल्कि पशु कल्याण और मानवीय दृष्टिकोण के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।

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