(नई दिल्ली): दिल्ली में यमुना नदी का जलस्तर बृहस्पतिवार सुबह 8 बजे पुराने रेलवे पुल पर 204.49 मीटर मापा गया, जो चेतावनी स्तर 204.50 मीटर से थोड़ा नीचे है। पिछले कई दिनों से जलस्तर खतरे के निशान के आसपास था, जिससे नदी के किनारे के इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ था। मौसम विभाग और बाढ़ नियंत्रण अधिकारियों की निगरानी जारी है। सुबह 7 बजे जलस्तर 204.52 मीटर था, जो एक घंटे में घटकर 204.49 मीटर हो गया। विशेषज्ञों का अनुमान है कि जलस्तर में और गिरावट आने की संभावना है।
मानसून में यमुना नदी का चरम स्तर
इस मानसून में यमुना नदी का जलस्तर इस महीने की शुरुआत में अपने चरम पर पहुंच गया था, जब यह 207 मीटर तक पहुंच गया था। इस कारण नदी के आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। स्थानीय प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी थी और लोगों को सचेत किया था।
बैराज से छोड़ा जा रहा पानी
जलस्तर बढ़ने का मुख्य कारण हथिनीकुंड और वजीराबाद बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़ा जाना बताया गया। बाढ़ नियंत्रण विभाग के अनुसार, वर्तमान में हथिनीकुंड बैराज से लगभग 25,139 क्यूसेक और वजीराबाद बैराज से 42,440 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। बैराज से छोड़ा गया पानी दिल्ली पहुंचने में करीब 48 से 50 घंटे का समय लेता है। इसके चलते जलस्तर में उतार-चढ़ाव सामान्य माना जाता है।
जनता को अपील
अधिकारियों ने जनता से नदी के किनारे जाने से बचने और सतर्क रहने की अपील की है। यद्यपि जलस्तर में कमी आई है, लेकिन स्थिति पर नजर बनी हुई है। आवश्यकतानुसार प्रशासन आपातकालीन कदम उठाने के लिए तैयार है। पुराना रेलवे पुल यमुना नदी के जलस्तर और बाढ़ के खतरे की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण अवलोकन स्थल है।
प्रशासन की सतर्कता
मौसम विभाग का अनुमान है कि आगामी दिनों में मानसून की स्थिति और बारिश के पैटर्न के अनुसार जलस्तर में और बदलाव हो सकता है। इसलिए अधिकारियों ने कहा है कि वे सतर्कता से स्थिति पर नजर रखेंगे। यमुना नदी के जलस्तर की निगरानी से संबंधित विभाग लगातार अलर्ट मोड में हैं, ताकि किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इस प्रकार जलस्तर में कमी की वजह से फिलहाल राहत मिली है, लेकिन प्रशासन और विभाग पूरी सावधानी बरत रहे हैं ताकि बाढ़ का कोई भी खतरा टला जा सके।