Nepal Gen-Z movement: भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश के बाद नेपाल के युवाओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दरअसल, नेपाल की राजधानी काठमांडू में हजारों युवा सड़कों पर उतरकर बड़े पैमाने पर आंदोलन कर रहे है। यह आंदोलन Gen-Z द्वारा सरकार के खिलाफ किया जा रहा है। सड़क से लेकर संसद तक युवा अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन की ओर मार्च किया…जहां पुलिस के साथ उनकी झड़प तक हो गई।
नेपाल आंदोलन में 20 लोगों की मौत
रिपोर्ट के मुताबिक 20 लोगों की मौत और लगभग सैकड़ों लोग घायल हो गए हैं…लेकिन सबसे बड़ा सवाल आखिर लोकतंत्र के मंदिर तक देश के युवाओं को दीवारें फांदकर क्यों पहुंचना पड़ा। श्रीलंका, बांग्लादेश के बाद अब नेपाल में अचानक हालात इतने बदतर कैसे हो गए…जो बात आंदोलन से कर्फ्यू, आगजनी और हताहत होने तक पहुंच गई। आइये आपको प्रदर्शन से जुड़ी हर एक बात बताते हैं।
सोशल मीडिया पर बैन के बाद मचा बवाल
दरअसल, नेपाल की ओली सरकार ने 4 सितंबर को 26 प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, जैसे फेसबुक, एक्स, व्हाट्सएप, यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर प्रतिबंध लगा दिया था… और फिर दवा किया कि ये प्लेटफॉर्म्स स्थानीय पंजीकरण और नियामक अनुपालन में विफल रहे। साथ ही नेपाल के संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा कि ‘इन कंपनियों को स्थानीय कार्यालय खोलने और शिकायत निवारण अधिकारियों को नियुक्त करने की जरूरत थी।’लेकिन युवाओं का मानना कुछ और ही है। युवाओं ने सरकार पर आरोप लगते हुए कहा कि यह प्रतिबंध सरकार की आलोचना को दबाने और डिजिटल स्वतंत्रता को खत्म करने की साजिश है…जिससे युवा सरकार के भ्रष्टाचारों के खिलाफ अपनी आवाज सोसाइल मीडिया के माध्यम से बुलंद न कर सके।
प्रदर्शनकारियों की क्या है मांगें?
Gen-Z के नेतृत्व में चल रहे है इस आंदोलन की दो प्रमुख मांग है। पहला, सोशल मीडिया पर प्रतिबंध हटाना और दूसरा, सरकार में चल रहे भ्रष्टाचार को खत्म करना। इस दौरान प्रदर्शनकारी पारदर्शिता, जवाबदेही और डिजिटल अधिकारों की मांग कर रहे हैं… साथ ही एक प्रदर्शनकारी ने सरकार के रवैये को तानाशाही करार देते हुए कहा कि अब हम बदलाव चाहते हैं… साथ ही हमारी पीढ़ी इसे और बर्दाश्त नहीं करेगी…
हिंसक झड़प और कर्फ्यू
आपको बता दें काठमांडू में प्रदर्शन शुरू में शांतिपूर्ण था, लेकिन जब प्रदर्शनकारी प्रदर्शन की आड़ में संसद भवन के प्रतिबंधित क्षेत्र में घुस गए तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। फिर पुलिस ने मोर्चा संभाला और प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पानी की बौछार, आंसू गैस और रबर की गोलियां चलाईं। लेकिन इसके बाद भी कुछ प्रदर्शनकारियों ने संसद परिसर में प्रवेश कर लिया। जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए काठमांडू जिला प्रशासन ने संसद, सरकारी सचिवालय और राष्ट्रपति भवन के आसपास कर्फ्यू लागू कर दिया।
Gen-Z के प्रदर्शन पर सरकार ने क्या कहा?
इस बीच नेपाल की केपी ओली सरकार ने दावा करते हुए कहा कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करती है और सिर्फ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को जिम्मेदार और जवाबदेह बनाने के लिए यह कदम उठाया गया था। साथ ही सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि वह स्वतंत्रता के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। बहरहाल देखा जाए तो यह आंदोलन श्रीलंका, बांग्लादेश की तरह नेपाल के राजनीतिक परिस्थिति में बड़ा बदलाव ला सकता है। साथी ही आरोप मुताबिक यह केवल सोशल मीडिया प्रतिबंध का मुद्दा नहीं बल्कि वर्षों से चली आ रही असंतोष और व्यवस्थित खामियों का विस्फोट है।