खट्टर ने महापौर परिषद की बैठक में रखी ‘विकसित भारत’ की रूपरेखा, शहरी विकास को बताया अवसर

Manohar Lal Khattar, Union Minister

Khattar on Developed India (करनाल): केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने रविवार को करनाल में आयोजित अखिल भारतीय महापौर परिषद की 53वीं वार्षिक बैठक में भाग लिया और शहरी विकास को लेकर अपना विजन साझा किया। उन्होंने कहा कि भारत जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2047 तक विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है, तब शहरों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

अर्बनाइजेशन चुनौती नहीं, अवसर

खट्टर ने कहा कि शहर अब केवल निवास के स्थान नहीं हैं, बल्कि वे आर्थिक विकास के इंजन, नवाचार के केंद्र और संस्कृति के संगम बन चुके हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आज भारत सरकार अर्बनाइजेशन को चुनौती नहीं, बल्कि अवसर के रूप में देख रही है। “हमारा विजन है कि शहर ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ का संगम बनें। उन्होंने यह भी कहा कि शहरों का विकास केवल भवनों और सड़कों के निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि शहरों को जीवंत, संवेदनशील और आत्मनिर्भर भी बनाया जाना चाहिए। शहरी क्षेत्र भविष्य में देश की प्रगति के आधार स्तंभ होंगे।

2047 तक शहरी आबादी में बड़ा इजाफा

खट्टर ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत की एक बहुत बड़ी जनसंख्या शहरी क्षेत्रों में निवास करेगी। यह सिर्फ एक जनसंख्या वृद्धि नहीं है, बल्कि इसमें नए अवसर, आधुनिक बुनियादी ढांचा और बेहतर जीवनशैली की व्यापक संभावनाएं निहित हैं। उन्होंने महापौरों और नगर निकायों से आह्वान किया कि वे केंद्र सरकार के विकास एजेंडे के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करें और शहरी योजनाओं को नीति आधारित, भागीदारीपूर्ण और दीर्घकालिक बनाएं।

‘विकसित भारत’ में शहरी निकायों की अहम जिम्मेदारी

बैठक के दौरान खट्टर ने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में नगर निगमों, नगर परिषदों और महापौरों की भूमिका केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि दृष्टि और नेतृत्व की होगी। “हमें न केवल बुनियादी सुविधाएं देनी हैं, बल्कि नागरिकों को गर्व और आत्मनिर्भरता की भावना से जोड़ना है। अखिल भारतीय महापौर परिषद की इस बैठक में देशभर के कई नगर निकाय प्रमुख शामिल हुए और शहरी प्रशासन को लेकर विचार-विमर्श हुआ।

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