सीएम नीतीश का बड़ा ऐलान, शिक्षा विभाग के कर्मियों को वेतन में दोगुनी बढ़ोतरी

CM Nitish big announcement :(पटना):बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को राज्य के हजारों सहायक शिक्षा कर्मियों को बड़ी सौगात दी। उन्होंने सरकारी स्कूलों में कार्यरत रसोइयों, रात्रि प्रहरियों और शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य प्रशिक्षकों के मानदेय में दोगुनी वृद्धि की घोषणा की। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य में विधानसभा चुनाव के कुछ ही महीने शेष हैं, और सरकार लगातार जनता को साधने के लिए लोककल्याणकारी योजनाओं का ऐलान कर रही है।

मुख्यमंत्री ने यह जानकारी सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की। उन्होंने लिखा, “शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में रसोइयों, रात्रि प्रहरियों तथा शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। इन्हें सम्मान देने हेतु हमने उनके मानदेय में उल्लेखनीय वृद्धि करने का निर्णय लिया है।”

किस वर्ग को कितना लाभ?

सरकार की नई नीति के अनुसार, मध्याह्न भोजन योजना के अंतर्गत कार्यरत रसोइयों का मासिक मानदेय अब ₹1,650 से बढ़ाकर ₹3,300 कर दिया गया है। ये रसोइए प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में बच्चों को गर्म भोजन उपलब्ध कराते हैं, जो पोषण के साथ-साथ बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने में सहायक होता है।

रात्रि प्रहरियों, जो विद्यालय परिसरों की सुरक्षा का दायित्व संभालते हैं, उनका वेतन ₹5,000 से बढ़ाकर ₹10,000 प्रति माह कर दिया गया है। शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों, जो विद्यालयों में खेल, व्यायाम और स्वास्थ्य शिक्षा का प्रशिक्षण देते हैं, का वेतन अब ₹8,000 से बढ़कर ₹16,000 प्रति माह हो गया है। इसके अतिरिक्त, उनकी वार्षिक वेतन वृद्धि ₹200 से बढ़ाकर ₹400 की गई है।

शिक्षा सुधार पर जोर

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि उनकी सरकार 2005 से शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 में जब उनकी सरकार बनी थी, तब राज्य का शिक्षा बजट ₹4,366 करोड़ था, जो अब बढ़कर ₹77,690 करोड़ हो गया है। इस दौरान बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति, विद्यालय भवनों का निर्माण, और आधारभूत संरचनाओं के विकास जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए गए।

कर्मचारियों में उत्साह

सरकार को उम्मीद है कि इस निर्णय से सहायक कर्मियों का मनोबल बढ़ेगा, जिससे वे अपने कर्तव्यों को और अधिक समर्पण व उत्साह से निभाएंगे। साथ ही, इसका सीधा असर विद्यालयों के संचालन और शिक्षा की गुणवत्ता पर भी देखने को मिलेगा।

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