Operation Sindoor (नई दिल्ली):राज्यसभा में नेता और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. पी. नड्डा ने गुरुवार को विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए उन पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर जैसे संवेदनशील और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषय पर चर्चा की मांग करने वाले विपक्षी सदस्य जब वास्तव में जवाब सुनने का समय आया, तो वे सदन से वॉकआउट कर गए।
विपक्ष ने अपनाए दोहरे मापदंड
जेपी नड्डा ने कहा कि उच्च सदन में बुधवार को “पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत के सफल और निर्णायक ऑपरेशन सिंदूर” पर विशेष चर्चा रखी गई थी। विपक्ष की ओर से लगातार मांग की जा रही थी कि सरकार इस ऑपरेशन पर स्पष्ट जानकारी दे और संसद को विश्वास में ले। लेकिन जैसे ही गृह मंत्री अमित शाह ने इस मुद्दे पर विस्तार से बोलना शुरू किया, विपक्षी दलों के कुछ प्रमुख सांसद सदन से बाहर चले गए। नड्डा ने इसे गैर-जिम्मेदाराना और दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
2008 के मुंबई हमले का उदाहरण
नड्डा ने कहा कि 2008 में जब मुंबई पर आतंकी हमला हुआ था, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री और गृह मंत्री दोनों ने संसद में उपस्थित रहकर बहस में हिस्सा लिया और जवाब भी दिया। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय विपक्ष ने सरकार को सहयोग किया था, लेकिन अब की स्थिति बिल्कुल अलग है। उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब गृह मंत्री देश की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण वक्तव्य दे रहे थे, तब विपक्षी दलों ने सदन का अपमान करते हुए वॉकआउट कर दिया।”
“कौन बोलेगा यह सरकार का अधिकार”
नड्डा ने कार्य मंत्रणा समिति की बैठक का हवाला देते हुए कहा कि यह तय करना सरकार का विशेषाधिकार है कि किस मंत्री को किस मुद्दे पर बोलना है। विपक्ष की यह मांग कि फलां मंत्री को बोलना चाहिए, संवैधानिक परंपराओं के खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर पहले ही जानकारी दे दी गई थी कि सरकार की ओर से गृह मंत्री जवाब देंगे। बावजूद इसके, विपक्ष ने जानबूझकर सदन से दूरी बनाई।
“विपक्ष की मंशा सिर्फ राजनीति करना”
भाजपा अध्यक्ष ने विपक्ष के इस व्यवहार को ‘‘दोहरे मानदंड’’ का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा, “चर्चा की मांग करना और फिर जवाब से भाग जाना साफ दिखाता है कि विपक्ष का उद्देश्य केवल राजनीतिक लाभ उठाना है, न कि देशहित की गंभीर चर्चा में भाग लेना।”
राष्ट्रीय सुरक्षा पर राजनीति नहीं
नड्डा ने कहा कि जब बात राष्ट्रीय सुरक्षा की हो, तो सभी दलों को गंभीरता दिखानी चाहिए। उन्होंने विपक्ष के रवैये को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि ऐसे गंभीर मुद्दों पर बहस के दौरान सदन से वॉकआउट करना देशहित के खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष केवल राजनीतिक स्टंट कर रहा है और वास्तविक चर्चा से बच रहा है